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| मुरैना; खांसी छिपी तो खतरा बढ़ेगा: गांव-गांव पहुंची टीबी-एचआईवी जांच टीम, लोगों से कहा—लक्षण न छुपाएं Aajtak24 News |
मुरैना - जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को ग्राम कासपुरा और गुड़ा आसन में टीबी-एचआईवी स्क्रीनिंग शिविर लगाया गया, जहां ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें जागरूक किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पद्मेश उपाध्याय के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का संचालन राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी नरेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व और मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी आर.एस. सेमिल के मार्गदर्शन में किया गया।
शिविर के दौरान आरबीएसके टीम की डॉ. रचना अहिरवार, आईसीटीसी काउंसलर संदीप सेंगर, सीएचओ हरिचरण त्यागी सहित स्वास्थ्य अमले ने गांव में भ्रमण कर लोगों को शिविर में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों को टीबी और एचआईवी संक्रमण के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य टीम ने टीबी के संभावित लक्षण वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर खखार जांच के लिए सैंपल कंटेनर वितरित किए। साथ ही एक्स-रे जांच के लिए मरीजों को सिविल अस्पताल जौरा आने के लिए कहा गया। शिविर में महिला और पुरुषों की शुगर, ब्लड प्रेशर, एचआईवी सहित अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांचें भी की गईं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 100 दिवसीय अभियान का उद्देश्य टीबी मरीजों की जल्द पहचान कर उनका समय पर उपचार शुरू करना है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान भी चला रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- टीबी मुक्त भारत अभियान के बावजूद ग्रामीण इलाकों में लगातार नए संदिग्ध मरीज मिल रहे हैं, क्या यह स्वास्थ्य विभाग की पहले की स्क्रीनिंग व्यवस्था की विफलता नहीं दर्शाता?
- जिन लोगों को एक्स-रे और आगे की जांच के लिए अस्पताल बुलाया गया है, क्या प्रशासन उनके लिए मुफ्त परिवहन और इलाज की गारंटी देगा या फिर गरीब मरीज बीच में ही इलाज छोड़ देंगे?
- टीबी और एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग तो हो रही है, लेकिन क्या जिले में पर्याप्त दवाएं, लैब सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, या यह अभियान सिर्फ आंकड़ों तक सीमित रहेगा?
