दुर्ग; गर्मी नहीं, अब ‘हीट रिस्क’ मानकर तैयारी… प्रशासन ने लू और मौसमी बीमारियों पर बनाया एक्शन प्लान Aajtak24 News

दुर्ग; गर्मी नहीं, अब ‘हीट रिस्क’ मानकर तैयारी…  प्रशासन ने लू और मौसमी बीमारियों पर बनाया एक्शन प्लान Aajtak24 News

दुर्ग - बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के बीच गर्मी से जुड़ी बीमारियों की चुनौती को देखते हुए दुर्ग जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ग्रीष्मकालीन मौसमी बीमारियों की रोकथाम, स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी और जनजागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना और जिला स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र को अधिक सक्षम बनाना है। बैठक में आईडीएसपी दुर्ग के नोडल अधिकारी डॉ. सी.बी.एस. बंजारे ने लू और तापघात के लक्षणों तथा बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अत्यधिक गर्मी के दौरान बेहोशी, मांसपेशियों में जकड़न, चक्कर, तेज धड़कन, अधिक पसीना, सिरदर्द, दौरे और कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर संकेत हो सकते हैं।

क्या करें, क्या नहीं करें पर दिया गया जोर

बैठक में लोगों को पर्याप्त पानी पीने, ओआरएस लेने, नींबू पानी, छाछ और अधिक पानी वाले मौसमी फल खाने की सलाह दी गई। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और सिर ढककर बाहर निकलने की भी सलाह दी गई। वहीं दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक धूप से बचने, अत्यधिक शारीरिक गतिविधि कम करने और तेज गर्मी के समय खाना पकाने जैसी गतिविधियों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

बच्चों और संवेदनशील वर्गों पर विशेष ध्यान

प्राथमिक उपचार के रूप में बच्चों को तुरंत छांव में लाने, कपड़े ढीले करने, पानी से शरीर ठंडा करने और उल्टी की स्थिति में सुरक्षित करवट देने जैसे उपाय बताए गए। प्रशासन ने जानकारी दी कि मितानिन, एएनएम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही नगरीय निकायों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ समन्वय बनाकर शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिले में अब तक लू या गर्मी से जुड़ी बीमारियों के कितने मामले सामने आए हैं और क्या उनके लिए अलग निगरानी तंत्र बनाया गया है?

2. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दवाइयां उपलब्ध कराने की बात कही गई है—लेकिन क्या सभी ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक वास्तविक वितरण पूरा हो चुका है?

3. जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य पर बैठक हुई, लेकिन क्या जिले के लिए कोई सार्वजनिक “हीट एक्शन प्लान” या वार्ड स्तर की आपात रणनीति भी तैयार की गई है?

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