रतलाम; खाद की किल्लत या सिर्फ दावे? रतलाम में प्रशासन बोला— गोदाम भरे हैं, किसानों को मिल रहा पर्याप्त उर्वरक Aajtak24 News

रतलाम; खाद की किल्लत या सिर्फ दावे? रतलाम में प्रशासन बोला— गोदाम भरे हैं, किसानों को मिल रहा पर्याप्त उर्वरक Aajtak24 News

रतलाम - जिले में खरीफ सीजन से पहले खाद उपलब्धता को लेकर प्रशासन ने बड़ा दावा किया है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण उपलब्ध है और ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किसानों को सुचारू रूप से खाद वितरित किया जा रहा है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास आर.के. सिंह ने बताया कि 16 मई तक जिले में ई-विकास पोर्टल के जरिए 264 टोकन जनरेट किए गए, जिनके माध्यम से किसानों को यूरिया, डीएपी, एनपीके, टीएसपी, एसएसपी और एमओपी उर्वरकों का वितरण किया गया।

उन्होंने जानकारी दी कि 1 अप्रैल से 16 मई तक कुल 14,117 टोकन जनरेट हुए हैं, जबकि 5,694 किसानों ने उर्वरकों की खरीदी की है। इस अवधि में किसानों को सैकड़ों मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में कुल 17,499.73 मीट्रिक टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें यूरिया, डीएपी, टीएसपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी जैसे प्रमुख उर्वरक शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

रविवार को संयुक्त निरीक्षण दल द्वारा सैलाना विकासखंड की उर्वरक फर्मों का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण दल में उप संचालक आर.के. सिंह, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी वाय.एस. निनामा और मास्टर ट्रेनर आनंदीलाल पाटीदार शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने दावा किया कि किसानों को ई-टोकन के माध्यम से आसानी से उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है और फिलहाल किसी प्रकार की तकनीकी या वितरण संबंधी समस्या सामने नहीं आई है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि ई-टोकन जनरेट करने में किसी प्रकार की परेशानी हो तो वे अपने क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी या कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें। प्रशासन का कहना है कि किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. प्रशासन पर्याप्त खाद भंडारण का दावा कर रहा है, लेकिन हर सीजन में किसान खाद के लिए लंबी कतारों और कालाबाजारी की शिकायत क्यों करते हैं?
  2. 14 हजार से ज्यादा टोकन जनरेट होने के बावजूद केवल 5694 किसानों ने ही खाद खरीदी। क्या ई-टोकन व्यवस्था में तकनीकी बाधाएं या वितरण असमानता की समस्या है?
  3. क्या कृषि विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि निजी उर्वरक विक्रेता किसानों को खाद के साथ अनावश्यक उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर न करें, जैसा कि कई जिलों में शिकायतें सामने आती रही हैं?

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