सतना; सीमांकन से आवास तक… सतना जनसुनवाई में फूटा जनता का गुस्सा Aajtak24 News

सतना; सीमांकन से आवास तक… सतना जनसुनवाई में फूटा जनता का गुस्सा Aajtak24 News

सतना - सतीश कुमार एस के निर्देशन में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जनसुनवाई में कुल 125 आवेदकों ने आवेदन प्रस्तुत किए, जिनमें जमीन विवाद, आवास, रोजगार, बिजली और सामाजिक योजनाओं से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रहीं। जनसुनवाई में शैलेन्द्र सिंह और संदीप परस्ते ने आवेदकों की समस्याएं सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को जवाबदेही तय करने और समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें जमीन से जुड़े मामलों की रहीं। लोग सीमांकन, दाखिल-खारिज, जमीन पर कब्जा दिलाने और अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग लेकर पहुंचे। कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग में महीनों से फाइलें लंबित पड़ी हैं और बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं हो रहा। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, खाद्यान पात्रता पर्ची और संबल योजना से जुड़े आवेदन भी बड़ी संख्या में आए। कई आवेदकों ने पात्र होने के बावजूद योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई। दिव्यांग हितग्राहियों ने मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने और जरूरतमंद परिवारों ने चिकित्सा सहायता और भरण-पोषण की मांग रखी।

जनसुनवाई में रोजगार और बिजली समस्याओं से जुड़े आवेदन भी सामने आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने बिजली आपूर्ति बाधित रहने और रोजगार के अवसर नहीं मिलने की शिकायत प्रशासन के सामने रखी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों का प्राथमिकता से समाधान किया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। हालांकि हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोगों का जनसुनवाई तक पहुंचना यह संकेत भी दे रहा है कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा। बुनियादी सेवाओं और योजनाओं के लिए लोगों को जिला मुख्यालय तक आना पड़ रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि सीमांकन, दाखिल-खारिज और अवैध कब्जे जैसे मामले लगातार जनसुनवाई में आ रहे हैं, तो राजस्व विभाग तहसील स्तर पर समाधान क्यों नहीं कर पा रहा?
  2. प्रधानमंत्री आवास और संबल योजना के पात्र हितग्राहियों को अब तक लाभ क्यों नहीं मिला, और इसके लिए किसकी जवाबदेही तय की गई है?
  3. क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले छह महीनों में जनसुनवाई में मिले कितने आवेदन आज भी लंबित हैं और किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है?

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