| बीजापुर; गंगालूर में योजनाओं का महाकुंभ” – जनसमस्या निवारण शिविर में उमड़ा जनसैलाब Aajtak24 News |
बीजापुर - सुशासन तिहार के तहत गंगालूर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में मंगलवार को भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आसपास के दर्जनों गांवों—गंगालूर, डोडीतुमनार, गमपुर, पीड़िया, बुरजी, मेटापाल, पुसनार, गोंगला, कमकानार, पदमुर, चेरपाल, पालनार और तोड़का—से आए हजारों ग्रामीणों ने शिविर में पहुंचकर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लिया। इस बड़े जनसमूह ने शासन-प्रशासन के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत दिया।
शिविर में योजनाओं का त्वरित लाभ, स्टॉलों पर भीड़
शिविर में लगाए गए विभिन्न विभागीय स्टॉलों पर ग्रामीणों की भीड़ देखने को मिली। कलेक्टर श्री विश्वदीप ने स्वयं सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने शिविर में ही लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देकर सेवाओं को और सरल बनाने पर जोर दिया।
103 हितग्राहियों को मिला वनाधिकार पत्र
शिविर का सबसे बड़ा आकर्षण रहा—
- 103 ग्रामीणों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र का वितरण
- नक्सल प्रभावित 2 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान की प्रतीकात्मक चाबी
- 28 हितग्राहियों को श्रम कार्ड
इसके अलावा राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, मृदा परीक्षण कार्ड, डिजिटल पुस्तकें और मत्स्य विभाग की सामग्री (जाल व आइस बॉक्स) भी वितरित की गई।
“घर बैठे दस्तावेज” की अवधारणा पर जोर
कलेक्टर ने बताया कि—
- जन्म प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- राशन कार्ड
- आयुष्मान कार्ड
- जाति प्रमाण पत्र
जैसे जरूरी दस्तावेज अब शिविरों और “बस्तर मुन्ने” अभियान के माध्यम से घर-घर जाकर भी बनाए जा रहे हैं।
DBT से सीधे खाते में लाभ
कलेक्टर ने ग्रामीणों को बताया कि—
- पीएम आवास योजना
- महतारी वंदन योजना
- पीएम किसान योजना
- मातृत्व वंदना योजना
- धान खरीदी व तेंदूपत्ता राशि
सभी का पैसा सीधे बैंक खातों में DBT के जरिए भेजा जाता है, इसलिए बैंक खाता अनिवार्य है।
पुलिस अधीक्षक ने किया जागरूक
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने भी ग्रामीणों से अपील की कि वे—
- सरकारी योजनाओं से जुड़ें
- प्रशासन के साथ सहयोग करें
- विकास कार्यों में भागीदारी बढ़ाएं
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 103 वनाधिकार पत्र वितरण के बावजूद कितने मामलों की प्रक्रिया अभी लंबित है और उनकी समयसीमा क्या तय की गई है?
- “हजारों की भीड़” वाले शिविरों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सेवा वितरण की गुणवत्ता को मापने का कोई स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र है या नहीं?
- शिविरों में मौके पर दस्तावेज बन रहे हैं, लेकिन क्या बाद में त्रुटियों और गलत एंट्री की जांच के लिए कोई डिजिटल सत्यापन या फॉलो-अप सिस्टम लागू किया गया है?