| बीजापुर; सुशासन तिहार में लापरवाही नहीं चलेगी” – बीजापुर में कलेक्टर विश्वदीप का सख्त संदेश Aajtak24 News |
बीजापुर - पदभार ग्रहण करने के बाद पहली साप्ताहिक समय-सीमा बैठक में कलेक्टर श्री विश्वदीप ने जिले के विकास कार्यों और शासन की प्राथमिक योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब हर कार्य में जवाबदेही, संवेदनशीलता और समयबद्धता अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का सुशासन तिहार अभियान आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए है, इसलिए शिविरों में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का गुणवत्तापूर्ण और समयसीमा में निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
“जनता का विश्वास ही प्रशासन की असली परीक्षा”
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि—
- अधिक से अधिक नागरिकों के आवेदन शिविरों में लिए जाएं
- हर आवेदन का समाधान कर उसकी जानकारी आवेदक तक पहुंचाई जाए
- योजनाओं के प्रति जनता का भरोसा मजबूत किया जाए
“बस्तर मुन्ने” अभियान पर शत-प्रतिशत फोकस
बैठक में “बस्तर मुन्ने” अभियान की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि—
- पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का 100% सैचुरेशन सुनिश्चित हो
- अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजना पहुंचे
- किसी भी पात्र व्यक्ति को वंचित न रखा जाए
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर सख्ती
कलेक्टर ने पीएमजीएसवाई, लोक निर्माण विभाग और PHE सहित सभी निर्माण एजेंसियों को चेतावनी देते हुए कहा—
- निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा
- हर कार्य की सतत मॉनिटरिंग जरूरी है
- तय समय में काम पूरा होना चाहिए
सूर्य घर योजना का प्रचार बढ़ाने के निर्देश
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा—
- योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए
- पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें जोड़ा जाए
- अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हों
समयपालन और अनुशासन पर सख्त रुख
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि—
- सभी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचें
- बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ें
- प्रशासनिक कार्यों में अनुशासन अनिवार्य हो
अन्य योजनाओं की भी समीक्षा
बैठक में कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी चर्चा हुई—
- जल जीवन मिशन
- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी)
- नक्सल पीड़ित परिवारों का पुनर्वास
- रेडक्रॉस सदस्यता और रक्तदान जागरूकता
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सुशासन तिहार में प्राप्त आवेदनों के निपटारे की वास्तविक प्रगति को मापने के लिए कोई सार्वजनिक डैशबोर्ड या स्वतंत्र निगरानी प्रणाली है या नहीं?
- “शत-प्रतिशत सैचुरेशन” का लक्ष्य बार-बार क्यों रखा जाता है, लेकिन कई योजनाएं जमीनी स्तर पर अधूरी क्यों रह जाती हैं—क्या इसके लिए जिम्मेदारी तय होती है?
- निर्माण कार्यों में गुणवत्ता जांच के बावजूद शिकायतें आती रहती हैं, तो क्या ठेकेदारों और निगरानी अधिकारियों की संयुक्त जवाबदेही तय करने की कोई सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी?