![]() |
| धार में नशे के खिलाफ बड़ा अलर्ट! स्कूल-कॉलेज बने फोकस, प्रशासन ने शुरू की सख्त तैयारी Aajtak24 News |
धार - राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-आर्डिनेशन (NCORD) बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले में बढ़ते नशे के प्रचलन और युवाओं पर उसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। बैठक में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को नशीली दवाओं की रोकथाम के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा अवैध नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संकट भी बनती जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि आमजन को नशीले पदार्थों से होने वाली शारीरिक बीमारियों, मानसिक प्रभावों और सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक किया जाए। इसके लिए गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
कलेक्टर ने विशेष रूप से स्कूल और कॉलेजों के वातावरण को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं और शैक्षणिक परिसरों में नशामुक्ति अभियान चलाया जाए। साथ ही युवाओं को खेल, सांस्कृतिक और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी बल दिया गया ताकि वे नशे के जाल से दूर रह सकें। बैठक में कानून व्यवस्था और अवैध कारोबार पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जिले में यदि कहीं भी नशे की अवैध बिक्री या संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिले तो तत्काल साझा कर कार्रवाई की जाए। प्रशासन का उद्देश्य नशे के खिलाफ एक ऐसा माहौल तैयार करना है जिसमें समाज भी सक्रिय भागीदारी निभाए।
सचिन शर्मा ने बैठक में बताया कि पुलिस विभाग जिले के उन संवेदनशील स्थानों की पहचान कर रहा है जहां नशे से जुड़ी गतिविधियों की आशंका है। ऐसे हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। हालांकि जिले में नशे के खिलाफ बार-बार बैठकें और अभियान चलने के बावजूद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर नशीले पदार्थों की उपलब्धता लगातार कैसे बनी हुई है। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति प्रशासन और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। बैठक में विजय डावर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि जिले में नशे के हॉटस्पॉट पहले से चिन्हित हैं, तो अब तक वहां अवैध कारोबार पूरी तरह बंद क्यों नहीं हो पाया?
- स्कूल और कॉलेजों में नशे की रोकथाम के लिए अब तक कितने काउंसलिंग सत्र और अभियान चलाए गए, और उनका वास्तविक असर क्या रहा?
- क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले एक वर्ष में जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री से जुड़े कितने बड़े नेटवर्क पकड़े गए और कितनों को सजा हुई?
