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| झाबुआ; जमीन अटकी तो विकास रुकेगा! झाबुआ में कलेक्टर ने अफसरों को दी सख्त चेतावनी Aajtak24 News |
झाबुआ - योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में जिले में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए लंबित भूमि आवंटन प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय के अभाव में विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए और भूमि आवंटन की प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी की जाए। बैठक में छात्रावास, आश्रम, खेल मैदान, स्टेडियम और नगर विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रकरणों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि भूमि आवंटन से पहले संबंधित भूमि के स्वामित्व, शीर्षक, अतिक्रमण और विवाद की स्थिति का गंभीर परीक्षण किया जाए, ताकि बाद में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।
समीक्षा के दौरान जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावास और आश्रम निर्माण से जुड़े 10 प्रकरणों, महिला एवं बाल विकास विभाग के 2 मामलों, नगर पालिका झाबुआ के 5 प्रकरणों तथा थांदला क्षेत्र से जुड़े 1 मामले पर चर्चा हुई। इसके अलावा एनवीडीए अंतर्गत नर्मदा-झाबुआ लाइन से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित विभाग तुरंत निर्माण और विकास कार्य शुरू करें, ताकि सरकारी जमीनों पर दोबारा अतिक्रमण की स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि कई बार भूमि आवंटन के बाद कार्य शुरू नहीं होने से जमीन विवाद और कब्जे की समस्या खड़ी हो जाती है।
बैठक में खेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। कलेक्टर ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि खेल विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर खेल मैदान और स्टेडियम निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर जल्द आवंटित की जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं मिल सकें। हालांकि जिले में बड़ी संख्या में भूमि आवंटन प्रकरणों का लंबित होना प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी गति की ओर भी संकेत कर रहा है। विकास परियोजनाओं में देरी का असर सीधे स्थानीय जनता और आधारभूत सुविधाओं पर पड़ता है। बैठक में सी.एस. सोलंकी, विजय कुमार मंडलोई, महेश मंडलोई, महेश बड़ोले और बी.एस. बघेल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन इतना महत्वपूर्ण है, तो जिले में अब तक इतने प्रकरण लंबित क्यों पड़े हैं?
- भूमि आवंटन के बाद भी कई परियोजनाएं वर्षों तक शुरू नहीं होतीं, ऐसे मामलों में जिम्मेदार विभागों पर क्या कार्रवाई होती है?
- क्या प्रशासन यह बताएगा कि जिले में कितनी सरकारी जमीनों पर वर्तमान में अतिक्रमण है और उन्हें मुक्त कराने के लिए क्या ठोस कार्रवाई की जा रही है?
