| सुकमा में ‘अंतर्यात्रा’ पहल से नक्सल पुनर्वास को नई दिशा, मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित बदलाव Aajtak24 News |
सुकमा - जिले में नक्सल पुनर्वास से जुड़े व्यक्तियों के सामाजिक और भावनात्मक पुनर्निर्माण के लिए “अंतर्यात्रा” पहल के तहत एक नया और संवेदनशील मॉडल लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहकर पुनर्वासित व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकार्यता को मजबूत करना है। यह पहल जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, साम्या भूमि फाउंडेशन और यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से संचालित की जा रही है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन कलेक्टर अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के नेतृत्व में किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंतर्गत 14 और 15 मई को नक्सल पुनर्वास केंद्र में दो दिवसीय गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें 25 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पहले दिन प्रतिभागियों के बीच संवाद, विश्वास और आत्मीयता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां कराई गईं, जिसमें उन्होंने अपने जीवन अनुभव, पारिवारिक यादें और सांस्कृतिक भावनाएं साझा कीं।
दूसरे दिन महिला प्रतिभागियों के साथ केंद्रित समूह चर्चा (FGD) आयोजित की गई, जिसमें समाज में पुनः स्वीकार्यता, भविष्य की चुनौतियों और नई शुरुआत को लेकर विस्तार से संवाद हुआ। रोल-प्ले और संवाद आधारित गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी भावनाएं और भविष्य की योजनाएं व्यक्त करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह पहल पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक मानवीय और प्रभावी बना रही है। इसमें सिर्फ दस्तावेज़ी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष को समझने और उसे मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या मानसिक स्वास्थ्य आधारित यह पहल पुनर्वासित लोगों के सामाजिक पुनर्स्थापन में वास्तविक बदलाव ला रही है, या यह केवल एक पायलट प्रोजेक्ट बनकर रह जाएगी?
- पुनर्वासित व्यक्तियों की सुरक्षा, रोजगार और सामाजिक स्वीकार्यता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की दीर्घकालिक रणनीति क्या है?
- क्या इस कार्यक्रम की सफलता को मापने के लिए कोई ठोस निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली (monitoring system) भी विकसित की गई है?