सिवनी; खाद वितरण में पारदर्शिता पर सख्ती”—डबल लॉक केंद्र पर प्रभारी कलेक्टर का औचक निरीक्षण Aajtak24 News

सिवनी; खाद वितरण में पारदर्शिता पर सख्ती”—डबल लॉक केंद्र पर प्रभारी कलेक्टर का औचक निरीक्षण Aajtak24 News

सिवनी - जिले में किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में प्रभारी कलेक्टर श्री अनिल कुमार राठौर ने डूंडासिवनी स्थित डबल लॉक खाद वितरण केंद्र का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केंद्र में उपलब्ध उर्वरक स्टॉक, भंडारण व्यवस्था और वितरण प्रक्रिया का मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि खाद का वितरण केवल ई-विकास प्रणाली के माध्यम से ही किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

किसानों को समय पर खाद—लापरवाही पर नहीं मिलेगी छूट

प्रभारी कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि—

  • खाद वितरण पूरी तरह पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो
  • किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो
  • वितरण प्रक्रिया में देरी या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

उन्होंने यह भी कहा कि खाद की उपलब्धता और मांग के अनुसार वितरण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

केंद्र पर मूलभूत सुविधाओं के निर्देश

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र पर—

  • पेयजल व्यवस्था
  • छाया की सुविधा
  • और भीड़ प्रबंधन

जैसी व्यवस्थाओं को तत्काल बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

पारदर्शिता पर फोकस

कलेक्टर ने दोहराया कि खाद वितरण व्यवस्था में तकनीक आधारित प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाया जाए, ताकि हर किसान को उसका हक बिना बिचौलियों के सीधे मिल सके। उन्होंने कहा कि ई-विकास प्रणाली के माध्यम से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वितरण की निगरानी भी आसान होगी।

डबल लॉक केंद्र का यह निरीक्षण इस बात का संकेत है कि अब उर्वरक वितरण व्यवस्था में “मैनुअल सिस्टम” की जगह पूरी तरह डिजिटल और निगरानी आधारित मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. ई-विकास प्रणाली से खाद वितरण अनिवार्य होने के बावजूद क्या सभी केंद्रों पर यह व्यवस्था 100% लागू हो चुकी है, और यदि नहीं तो देरी की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
  2. डबल लॉक केंद्रों पर अक्सर भीड़ और शिकायतें सामने आती हैं—क्या इस बार भीड़ प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई स्थायी मैकेनिज्म तैयार किया गया है?
  3. खाद की उपलब्धता और वितरण में “किसान को समय पर सुविधा” का दावा किया जाता है, लेकिन क्या जिलेवार वास्तविक मांग और आपूर्ति का कोई सार्वजनिक ऑडिट सिस्टम लागू है?

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