
गुना; अब गांव-गांव पहुंचेगा इंसाफ! ‘मोबाइल कोर्ट’ ने मौके पर खुलवाया रास्ता Aajtak24 News
गुना - जिले में भूमि संबंधी विवादों के त्वरित निराकरण के लिए प्रशासन द्वारा शुरू की गई “मोबाइल कोर्ट” पहल ग्रामीणों के लिए राहत का माध्यम बनती जा रही है। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार राजस्व विभाग मौके पर पहुंचकर आपसी सहमति और सीमांकन के जरिए विवादों का समाधान कर रहा है। इसी क्रम में जनसुनवाई में प्राप्त एक आवेदन के आधार पर ग्राम नेव, तहसील आरोन निवासी संजीव साहू की रास्ते संबंधी समस्या का समाधान मोबाइल कोर्ट के माध्यम से किया गया। राजस्व दल मौके पर पहुंचा और मुख्य मार्ग से आवेदक के घर तक रास्ता खुलवाकर विवाद का निराकरण कराया। लंबे समय से रास्ता बाधित होने के कारण आवेदक को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
इसके अलावा ग्राम बालापुरा, तहसील आरोन में भूमि विवाद के मामले में भी प्रशासन ने मौके पर कार्रवाई की। आवेदक ओमकार अहिरवार की भूमि सर्वे क्रमांक 401/1/2 एवं 4/1/2, कुल रकबा 0.418 हेक्टेयर पर राजस्व दल द्वारा सीमांकन कराया गया। सीमांकन के बाद आवेदक को भूमि का कब्जा भी सौंप दिया गया। मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई के दौरान तहसीलदार धीरेन्द्र गुप्ता, राजस्व निरीक्षक बृजेंद्र सिंह बरैया, हल्का पटवारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का समय पर समाधान कर न्याय प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। राजस्व अधिकारियों के अनुसार मोबाइल कोर्ट के जरिए लोगों को तहसील और कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिल रही है और विवादों का निपटारा मौके पर ही किया जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- मोबाइल कोर्ट के जरिए मौके पर विवाद सुलझाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड है जिससे पता चले कि इन मामलों में बाद में दोबारा विवाद या कानूनी चुनौती नहीं आई?
- ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से लंबित सीमांकन और रास्ते के विवाद मौजूद हैं, तो आखिर प्रशासन अब तक नियमित राजस्व व्यवस्था के माध्यम से इन समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं कर पाया?
- क्या मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी है? कई मामलों में ग्रामीणों द्वारा दबाव या प्रभाव में समझौते कराने के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था है?