रायगढ़; तालाब से बदली तकदीर! कुंजेमुरा में महिलाओं को मिला ‘आजीविका डबरी’ का तोहफा Aajtak24 News

रायगढ़; तालाब से बदली तकदीर! कुंजेमुरा में महिलाओं को मिला ‘आजीविका डबरी’ का तोहफा Aajtak24 News

रायगढ़ - विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप चल रहे “सुशासन तिहार” और “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत रायगढ़ जिले में महिला सशक्तिकरण और जल संरक्षण का नया मॉडल उभरकर सामने आया है। तमनार विकासखंड के ग्राम कुंजेमुरा में आयोजित शिविर में महिलाओं को आजीविका आधारित संसाधन उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। शिविर में गायत्री मां स्व-सहायता समूह की सदस्य सनमेत अगरिया को नव-निर्मित आजीविका डबरी का स्वामित्व और प्रबंधन सौंपा गया। यह डबरी अब मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य जल आधारित आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनेगी।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री सत्यानंद राठिया, जनपद अध्यक्ष जागेश सिदार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने प्रमाण पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला, क्योंकि यह पहल सीधे उनकी आय और आत्मनिर्भरता से जुड़ी है। जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे ने कहा कि आजीविका डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम है। इसके जरिए मत्स्य पालन, उद्यानिकी, साग-सब्जी उत्पादन और जलीय फसलें विकसित की जाएंगी, जिससे महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि होगी।

प्रशासन के अनुसार रायगढ़ जिले में इस समय 400 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण कार्य चल रहा है, जिन्हें मनरेगा के तहत जल्द पूरा किया जाएगा। इसके अलावा “नवा तरिया आय का जरिया” परियोजना के तहत 23 नए तालाब भी बनाए जा रहे हैं, जो विशेष रूप से महिला समूहों की आजीविका गतिविधियों के लिए विकसित किए जा रहे हैं। पिछले दो वर्षों से चल रहे “जल संकल्प” अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों के उपयोग और प्रबंधन में बदलाव देखा जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या 400 डबरियों और 23 तालाबों की योजना केवल निर्माण तक सीमित रहेगी, या इनसे वास्तविक और स्थायी आय का मॉडल भी सुनिश्चित किया गया है?
  2. जिन महिला समूहों को डबरी दी जा रही है, क्या उनके पास मत्स्य पालन और जल आधारित व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण और बाजार की गारंटी भी है?
  3. क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले “जल संकल्प” और “मोर गांव मोर पानी” अभियानों से कितने परिवारों की आय में वास्तविक वृद्धि हुई है?

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