मोहला; सुशासन तिहार के आवेदन बने ‘टेस्ट केस’! कलेक्टर ने दी सख्त चेतावनी Aajtak24 News

मोहला; सुशासन तिहार के आवेदन बने ‘टेस्ट केस’! कलेक्टर ने दी सख्त चेतावनी Aajtak24 News

मोहला - तुलिका प्रजापति ने मंगलवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा बैठक में सुशासन तिहार के तहत प्राप्त आवेदनों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभागवार लंबित और निराकृत आवेदनों की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रकरणों का प्राथमिकता और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में भारती चंद्राकर, जीआर मरकाम, मिथलेश डोंडे, हेमेंद्र भुआर्य और अमित नाथ योगी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कलेक्टर ने कहा कि शिकायत संबंधी आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि मांग संबंधी आवेदनों में पात्रता की जांच कर नियमानुसार निर्णय लिया जाए, ताकि वास्तविक हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिल सके। राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी अधिकारियों को तय समयसीमा में लंबित मामलों के निपटारे के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में देरी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में ई-ऑफिस प्रणाली की प्रगति पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने सभी विभागों को डिजिटल कार्य प्रणाली को मजबूत करने और फाइल मूवमेंट तेज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अनिवार्य बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी सख्ती दिखाई गई।

सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। वहीं आरसेटी भवन की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने शीघ्र कोर्स शुरू कराने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। पीएचई, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में पेयजल व्यवस्था को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जनदर्शन में लंबित आवेदनों के त्वरित निराकरण पर भी जोर दिया गया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. सुशासन तिहार में आए आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, क्या यह संकेत है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर है?
  2. ई-ऑफिस और बायोमेट्रिक व्यवस्था के बावजूद लंबित आवेदन क्यों बढ़ रहे हैं—क्या निगरानी तंत्र प्रभावी नहीं है?
  3. क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले महीनों में कितने मामलों का समय-सीमा के भीतर वास्तविक रूप से समाधान हुआ और कितनों में देरी हुई?

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