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| बैतूल; खेत तक पहुंचा ‘ज्ञान का रथ’… लेकिन क्या तकनीक से सच में बढ़ेगी किसान की आमदनी? Aajtak24 News |
बैतूल - कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से बुधवार को कृषि रथ आठनेर विकासखंड के ग्राम कावला, सातकुंड और गोंडी घोघरा पहुंचा। यहां किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उपायों की जानकारी दी गई। कृषि रथ अभियान के दौरान कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संवाद किया और उन्हें खेती के साथ पशुपालन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को जोड़ने की सलाह दी। अधिकारियों ने बताया कि बदलती कृषि परिस्थितियों में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय विविध कृषि मॉडल अपनाना किसानों के लिए अधिक लाभकारी हो सकता है।
कार्यक्रम में किसानों को शासन की ई-विकास प्रणाली और ई-टोकन प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही किसानों को सलाह दी गई कि वे अपनी फॉर्मर आईडी में शेष खसरा नंबर जोड़ें, ताकि योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही दलहन और तिलहन फसलों के विस्तार, उत्पादन और विपणन संबंधी जानकारी भी साझा की गई।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किसानों को नि:शुल्क मिट्टी परीक्षण और उसके अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी दी गई। इसके अलावा नरवाई प्रबंधन के फायदे बताते हुए किसानों से खेतों में अवशेष न जलाने की अपील भी की गई। कार्यक्रम के दौरान किसानों के सवालों के जवाब देकर उन्हें तकनीकी सलाह भी दी गई। इस अवसर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, पशु चिकित्सक, फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. कृषि रथ के जरिए जानकारी तो दी जा रही है, लेकिन क्या विभाग के पास ऐसा कोई डेटा है जो बताए कि पहले जिन गांवों में यह अभियान चला वहां किसानों की आय या उत्पादन में वास्तविक सुधार हुआ?
2. प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की सलाह दी गई— क्या किसानों को संक्रमण अवधि के दौरान आर्थिक सहायता, बाजार और खरीद की कोई गारंटी भी उपलब्ध कराई जा रही है?
3. फॉर्मर आईडी, ई-टोकन और डिजिटल प्रणालियों पर जोर दिया जा रहा है— जिन किसानों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट या तकनीकी जानकारी नहीं है, उनके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है?
