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| मऊगंज; तालाब में उतरे कलेक्टर, उठाया फावड़ा… क्या जल संकट से पहले प्रशासन ने छेड़ दी तैयारी की जंग? Aajtak24 News |
मऊगंज - भीषण गर्मी, गिरता भूजल स्तर और आने वाले मानसून की चुनौती के बीच मऊगंज प्रशासन ने जल संरक्षण को लेकर जमीनी अभियान तेज कर दिया है। “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत बुधवार को कलेक्टर संजय कुमार जैन खुद ग्राम मुदरिया चौहान पहुंचे और भुअरा तालाब में श्रमदान कर जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दिया। यह केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि प्रशासन की उस कोशिश का हिस्सा था जिसमें सरकारी योजनाओं को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। तालाब परिसर में अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ श्रमदान करते हुए कलेक्टर ने साफ संकेत दिया कि जल संकट से निपटने के लिए केवल सरकारी संसाधन नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी भी जरूरी होगी।
तालाबों को बचाने का अभियान, स्वच्छता पर भी सख्ती
श्रमदान के दौरान कलेक्टर ने तालाब की स्थिति का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों को केवल संरक्षित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें प्रदूषण से बचाना भी उतना ही जरूरी है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए कि तालाबों और अन्य जल स्रोतों में साबुन, डिटर्जेंट और रासायनिक अपशिष्टों का उपयोग नहीं किया जाएगा। घाटों और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी फैलाने वालों पर निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए।
मानसून से पहले जल संचयन बढ़ाने की तैयारी
प्रशासन के अनुसार अभियान के तहत तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई और गहरीकरण का कार्य लगातार जारी है ताकि आगामी मानसून में अधिक जल संग्रह किया जा सके। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी और सूखे के समय पानी की उपलब्धता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी। कलेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि जल संरक्षण केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और श्रमदान जैसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएं। अभियान के दौरान मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने भी श्रमदान कर जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. पिछले तीन वर्षों में जिले में जल संरक्षण और तालाब पुनर्जीवन पर कितना बजट खर्च हुआ और उसके बदले भूजल स्तर में वास्तविक सुधार कितना दर्ज किया गया?
2. जिन गांवों में हर साल गर्मी में पेयजल संकट सामने आता है, वहां स्थायी जल प्रबंधन योजना कब तक लागू होगी और उसकी जवाबदेही किस विभाग की होगी?
3. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किए जा रहे श्रमदान और सफाई कार्यों की निगरानी के लिए क्या कोई सार्वजनिक ऑडिट या परिणाम आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी बनाई गई है?
