हरदा में शिविर में खुलकर हुई बाल अधिकारों और शोषण पर चर्चा Aajtak24 News

हरदा में शिविर में खुलकर हुई बाल अधिकारों और शोषण पर चर्चा Aajtak24 News

हरदा - बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और उनके अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हरदा में ‘सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य’ अभियान के तहत विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानूनों की जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और उपलब्ध सहायता तंत्र से जोड़ना भी रहा। यह शिविर मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में संकल्प एकेडमी, हरदा में आयोजित किया गया।

बाल विवाह, शोषण और शिक्षा पर केंद्रित रहा संवाद

शिविर में जिला विधिक सहायता अधिकारी सौरभ कुमार दुबे ने छात्र-छात्राओं को बताया कि ‘सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य’ अभियान बच्चों को यौन अपराधों, शोषण और बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं से बचाने की दिशा में चलाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा को बच्चों के सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य का आधार बताया।

छात्रों को बताई गई कानूनी सहायता योजनाएं

कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए मैत्रीपूर्ण विधिक सेवा योजना, अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना और महिलाओं के लिए प्रतिकर संबंधी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि कानूनी सहायता केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क सलाह और सहायता की व्यवस्था भी उपलब्ध है।

दहेज और पॉक्सो कानून पर विशेष चर्चा

शिविर में दहेज प्रथा को सामाजिक चुनौती बताते हुए इसे सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण के जरिए समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही छात्रों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) और आपात स्थिति में बच्चों की सहायता के लिए 1098 हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।

कानूनी जानकारी को बनाया गया व्यवहारिक

डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अनीस मोहम्मद खान ने छात्रों को विधिक साक्षरता के महत्व, यातायात नियमों और कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लोग प्राधिकरण, पोर्टल या हेल्पलाइन के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. विधिक जागरूकता शिविरों के बाद यह कैसे आंका जाता है कि बच्चों और अभिभावकों के व्यवहार या जागरूकता में वास्तविक बदलाव आया है?

2. जिले में पिछले एक वर्ष में बाल विवाह, बाल शोषण या पॉक्सो से जुड़े मामलों में क्या कमी आई है, और उसके आंकड़े क्या कहते हैं?

3. जिन बच्चों को कानूनी सहायता या सुरक्षा की जरूरत होती है, क्या उनके लिए फॉलो-अप और मनोसामाजिक सहायता की भी कोई व्यवस्था मौजूद है?

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