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| शिवपुरी; ढाबे से फैक्ट्री तक अलर्ट: अब बाल मजदूरी मिली तो सीधे कार्रवाई, कलेक्टर का सख्त संदेश Aajtak24 News |
शिवपुरी - जिले में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि अब दुकानों, ढाबों, कारखानों या किसी भी प्रकार के नियोजन में बच्चों से काम कराना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने श्रम विभाग को निर्देश दिए हैं कि जिले में लगातार जांच अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिला स्तरीय समिति की बैठक में कलेक्टर ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने श्रम निरीक्षक को निर्देश दिए कि संबंधित विभागों और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए और बाल एवं बंधक श्रम जैसी गतिविधियों को जड़ से समाप्त करने की दिशा में काम किया जाए।
बैठक के दौरान जिले में बाल श्रम और बंधक श्रम प्रथा के उन्मूलन को लेकर अब तक की कार्रवाई और पूर्व में चलाए गए रेस्क्यू अभियानों की भी समीक्षा की गई। प्रशासन ने संकेत दिए कि केवल औपचारिक बैठकें नहीं, बल्कि जमीन पर निगरानी और कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। श्रम निरीक्षक ने बैठक में जानकारी दी कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के व्यवसाय या प्रक्रिया में नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं वर्ष 2016 के संशोधन के बाद 14 से 18 वर्ष की आयु वर्ग को किशोर श्रेणी में शामिल किया गया है, जिन्हें किसी भी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करने की अनुमति नहीं है।
अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यदि कोई नियोजक नियमों का उल्लंघन करते हुए बाल श्रम कराता पाया जाता है तो उसके खिलाफ 2 वर्ष तक की कैद और 50 हजार रुपए तक जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई नहीं बल्कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य से जोड़ना भी है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिले में पिछले एक वर्ष में कितनी दुकानों, ढाबों और कारखानों की जांच हुई और उनमें से कितनों पर वास्तव में दंडात्मक कार्रवाई की गई?
2. रेस्क्यू किए गए बच्चों की आगे की निगरानी, शिक्षा और पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन के पास क्या ठोस व्यवस्था है?
3. यदि बाल श्रम पूरी तरह प्रतिबंधित है तो जिले में ऐसे मामले लगातार सामने क्यों आते हैं—क्या निरीक्षण व्यवस्था पर्याप्त नहीं है या कार्रवाई का डर कम है?
