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| दतिया; 128 फरियादी, एक जनसुनवाई और कई सवाल: क्या कलेक्टर के निर्देश अब जमीन पर भी दिखेंगे? Aajtak24 News |
दतिया - आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से मंगलवार को दतिया के न्यू कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 128 से अधिक आवेदकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागीय अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में प्रशासनिक स्तर पर सबसे ज्यादा जोर लंबित मामलों के शीघ्र समाधान पर दिखाई दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों का तत्काल निराकरण संभव नहीं है, उनके लिए समय-सीमा तय कर जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्रवाई करनी होगी।
जनसुनवाई के दौरान ग्राम जिगना के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से आवेदन देकर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग उठाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तहसीलदार बड़ौनी को आवश्यक कार्रवाई कर शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। वहीं ग्राम भिल्ला पंचायत रावरी के ग्रामीणों ने गांव से दाउ बाबा स्थान तक आम रास्ते पर सड़क निर्माण की मांग रखी। इस आवेदन पर कलेक्टर ने सुनवाई करते हुए सीईओ जनपद पंचायत दतिया को आवश्यक कार्रवाई कर समस्या के समाधान के निर्देश दिए।
इसके अलावा जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन भी पहुंचे जो आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़े थे। इनमें रास्ता अवरुद्ध होने, नाली निकासी, वृद्धावस्था पेंशन, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, बीपीएल सूची में नाम जोड़ने, सड़क निर्माण, सफाई व्यवस्था, खाद्यान्न वितरण, आर्थिक सहायता और छात्रवृत्ति से जुड़े मामले शामिल रहे। प्रशासन की ओर से कुछ मामलों का मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि शेष प्रकरणों को संबंधित विभागों को सौंपकर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अक्षय कुमार तेम्रवाल, अपर कलेक्टर महेन्द्र सिंह कवचे, संयुक्त कलेक्टर श्रुति अग्रवाल सहित जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जनसुनवाई में 128 से ज्यादा आवेदन आए, लेकिन प्रशासन यह कब और कैसे सार्वजनिक करेगा कि इनमें से कितने मामलों का वास्तव में समय-सीमा के भीतर समाधान हुआ?
2. सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने और आम रास्तों की मांग जैसे मामले सामने आए—क्या प्रशासन ऐसे विवादित मामलों की जिला स्तर पर अलग मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाएगा या हर बार लोगों को जनसुनवाई का इंतजार करना पड़ेगा?
3. हर सप्ताह जनसुनवाई में सड़क, पेंशन, सीमांकन और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े आवेदन आते हैं—क्या यह संबंधित विभागों की नियमित कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाता कि लोगों को सीधे कलेक्टर तक पहुंचना पड़ रहा है?
