![]() |
| गुना; 298 फरियादी, एक जनसुनवाई और मौके पर राहत: क्या व्यवस्था अब दफ्तर से निकलकर लोगों तक पहुंचेगी? |
गुना - जिले में आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। इस बार जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे और प्रशासन के सामने कुल 298 आवेदन प्रस्तुत किए गए। इनमें सीमांकन, बिजली, पेंशन, नगरपालिका, स्वास्थ्य सेवाएं और नामांतरण से जुड़े मामले प्रमुख रहे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से केवल आवेदन लेने तक सीमित न रहकर कुछ जरूरतमंद लोगों को तत्काल राहत भी प्रदान की गई। आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहे आवेदकों को रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। कर्नलगंज निवासी नगमा बेगम, जिन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी और आर्थिक परेशानी का हवाला देते हुए सहायता मांगी थी, उन्हें राहत राशि प्रदान की गई। वहीं गोकुल सिंह का चक्क निवासी सगीर खान ने रोजगार शुरू करने के लिए सहायता की मांग की, जिस पर प्रशासन ने आर्थिक सहयोग स्वीकृत किया। इसके अलावा स्टेशन रोड निवासी कमलेश रजक को भी उपचार के लिए आर्थिक सहायता दी गई।
इन प्रकरणों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता राशि जरूरतमंद हितग्राहियों को चेक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। जनसुनवाई को केवल शिकायत मंच न बनाते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं को भी जोड़ा। कलेक्टर के निर्देश पर नागरिकों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 70+ आयुष्मान कार्ड, नेत्र परीक्षण, एचआईवी जांच और नि:शुल्क कानूनी सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिनका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ लिया।
कार्यक्रम में अपर कलेक्टर अखिलेश जैन, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक दुबे, एसडीएम शिवानी पांडेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जनसुनवाई में 298 आवेदन आए—क्या जिला प्रशासन सार्वजनिक रूप से बताएगा कि पिछले महीनों की जनसुनवाई के कितने आवेदन आज तक लंबित हैं?
2. जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता देना सराहनीय है, लेकिन क्या ऐसी सहायता के लिए कोई पारदर्शी पात्रता प्रणाली है या निर्णय मौके पर ही लिया जाता है?
3. हर सप्ताह सीमांकन, बिजली, पेंशन और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याएं बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं—क्या यह संबंधित विभागों की नियमित व्यवस्था की विफलता नहीं दर्शाता?
