आगर मालवा; गेहूं-सोयाबीन से आगे बढ़े किसान! अब तिल-उड़द और वैज्ञानिक खेती से ‘डबल इनकम’ का फार्मूला तलाश रहा Aajtak24 News

आगर मालवा; गेहूं-सोयाबीन से आगे बढ़े किसान! अब तिल-उड़द और वैज्ञानिक खेती से ‘डबल इनकम’ का फार्मूला तलाश रहा Aajtak24 News

आगर मालवा - जिले में खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए प्रशासन अब गांव-गांव जाकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ रहा है। “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत जिले में संचालित कृषि रथ किसानों को वैज्ञानिक खेती, फसल विविधिकरण और आय बढ़ाने के तरीके सिखा रहे हैं। कलेक्टर प्रीति यादव के मार्गदर्शन में जिले में वर्तमान में चार कृषि रथ संचालित किए जा रहे हैं, जो लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर किसानों को तकनीकी जानकारी दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार जिले के कई किसानों ने ग्रीष्मकाल में अतिरिक्त फसल के रूप में तिल और उड़द की खेती को अपनाना शुरू किया है, जिसे कृषि विशेषज्ञ आय बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

रविवार को कृषि रथ विकासखंड आगर, बड़ौद, सुसनेर और नलखेड़ा के विभिन्न गांवों में पहुंचा, जहां वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए। किसानों को फसल विविधिकरण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।कृषि रथ के साथ पहुंचे वैज्ञानिकों, उद्यानिकी अधिकारियों, पशुपालन विभाग और कृषि विभाग की टीम ने किसानों को ई-विकास प्रणाली से उर्वरक वितरण, जैविक खेती, मृदा परीक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट नियंत्रण और नरवाई प्रबंधन की जानकारी दी। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और कृषि संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया।

विकासखंड नलखेड़ा के ग्राम भण्डावद में आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक आर.पी.एस. शक्तावत ने खरीफ फसलों में रोग और कीट नियंत्रण के साथ उन्नत बीजों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और उन्नत किस्मों को अपनाकर किसान उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ा सकते हैं। उपसंचालक कृषि विजय चौरसिया ने किसानों से केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पशुपालन, मुर्गी पालन, पुष्प उत्पादन और फल उत्पादन जैसी गतिविधियों को खेती के साथ जोड़कर किसान अपनी आय में बड़ा इजाफा कर सकते हैं।

उन्होंने किसानों को उपज के भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी ध्यान देने की सलाह दी, ताकि बाजार में बेहतर कीमत मिल सके। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे कृषि रथ कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्राप्त करें।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. कृषि रथ और प्रशिक्षण कार्यक्रम हर साल चलाए जाते हैं, लेकिन जिले में किसानों की आय और कर्ज की स्थिति पर वास्तविक असर का कोई सार्वजनिक डेटा क्यों नहीं जारी किया जाता?
  2. किसानों को फसल विविधिकरण अपनाने की सलाह दी जा रही है, लेकिन तिल और उड़द जैसी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार की गारंटी क्या प्रशासन सुनिश्चित कर पाएगा?
  3. प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात हो रही है, लेकिन रासायनिक खाद और महंगे कृषि इनपुट पर किसानों की निर्भरता कम करने के लिए सरकार की ठोस रणनीति क्या है?

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