बैतूल; अब शहर नहीं, गांव बनेंगे ‘टूरिस्ट डेस्टिनेशन’! बैतूल के आदिवासी गांव में खुले ऐसे होमस्टे Aajtak24 News

बैतूल; अब शहर नहीं, गांव बनेंगे ‘टूरिस्ट डेस्टिनेशन’! बैतूल के आदिवासी गांव में खुले ऐसे होमस्टे Aajtak24 News

बैतूल - जिले के बज्जरवाड़ा गांव में अब जनजातीय संस्कृति सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि रोजगार का नया मॉडल बनकर उभर रही है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की “जनजातीय पर्यटन” परियोजना के तहत यहां तीन नए ट्राइबल होमस्टे शुरू किए गए हैं, जिनका उद्घाटन केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने किया। यह परियोजना “बैक टू विलेज” संस्था द्वारा बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के पांच गांवों में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य छोटे भूखंड वाले और आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों को पर्यटन के माध्यम से आय का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराना है।

उद्घाटन समारोह में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त मोहन नागर, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य मंगलसिंग धुर्वे, घोड़ाडोंगरी विधायक गंगा उइके और “बैक टू विलेज” के संस्थापक मनीष कुमार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री उइके ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्रामीण और जनजातीय जीवनशैली की ओर आकर्षित हो रही है क्योंकि गांव का जीवन प्राकृतिक, शांत और प्रदूषण मुक्त है। उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपराओं और संस्कृति में गहरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण छिपा है और ऐसे होमस्टे दुनिया तक इस संस्कृति को पहुंचाने का माध्यम बनेंगे।

महिलाओं के हाथ में होगी कमान

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सभी होमस्टे का मालिकाना हक परिवार की महिला सदस्य के नाम पर रखा गया है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। परियोजना से जुड़ी महिलाएं अब घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ सम्मानजनक आय भी अर्जित कर रही हैं। इसका असर गांवों में पलायन पर भी दिखाई देने लगा है। शहरों में काम करने गए कई पुरुष अब वापस गांव लौट रहे हैं और अपने परिवार के साथ होमस्टे संचालन में सहयोग कर रहे हैं।

जनजातीय संस्कृति बनेगी आकर्षण का केंद्र

विधायक गंगा उइके ने होमस्टे संचालकों को सुझाव दिया कि वे पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए पारंपरिक जनजातीय संगीत, स्थानीय भोजन और संस्कृति को और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करें। वहीं आयोग सदस्य मंगलसिंग धुर्वे ने कहा कि पारंपरिक खान-पान और जनजातीय जीवनशैली ही इस परियोजना की असली ताकत है।

“बैक टू विलेज” के संस्थापक मनीष कुमार ने कहा कि संस्था की कोशिश है कि गांव के हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति इस पर्यटन मॉडल से जुड़े। उन्होंने ग्रामीणों से अपनी परंपराओं और संस्कृति को बचाए रखने की अपील भी की।

कार्यक्रम की एक और खास बात यह रही कि पूरे आयोजन में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया। ग्राम पर्यटन समिति के अध्यक्ष पवन परते ने कहा कि जिम्मेदार और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन ही इस परियोजना की मूल भावना है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. ग्रामीण पर्यटन और ट्राइबल होमस्टे की कई योजनाएं पहले भी शुरू हुईं, लेकिन पर्याप्त पर्यटक नहीं मिलने से कई परियोजनाएं ठप पड़ गईं। क्या इस बार सरकार ने स्थायी पर्यटन मॉडल और मार्केटिंग की ठोस तैयारी की है?
  2. महिलाओं को मालिकाना हक देने की बात हो रही है, लेकिन क्या उनके नाम पर चल रहे होमस्टे का वास्तविक आर्थिक नियंत्रण भी महिलाओं के पास रहेगा या निर्णय अब भी पुरुष ही लेंगे?
  3. यदि गांवों में तेजी से पर्यटन बढ़ा तो क्या जनजातीय संस्कृति के व्यवसायीकरण और पारंपरिक जीवनशैली के नुकसान का खतरा नहीं बढ़ेगा? सरकार इसके संरक्षण के लिए क्या नीति बनाएगी?

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