दरवाजे-दरवाजे पहुंचा प्रशासन: गोहपारू में जनगणना की हकीकत पर अपर कलेक्टर की सीधी नजर Aajtak24 News

दरवाजे-दरवाजे पहुंचा प्रशासन: गोहपारू में जनगणना की हकीकत पर अपर कलेक्टर की सीधी नजर Aajtak24 News

शहडोल - जनगणना 2027 के तहत चल रहे मकान सूचीकरण और मकान गणना कार्यों की निगरानी अब प्रशासनिक स्तर पर तेज हो गई है। इसी क्रम में अपर कलेक्टर एवं जिला जनगणना अधिकारी सरोधन सिंह ने गोहपारू तहसील क्षेत्र का दौरा कर जनगणना कार्यों का जमीनी निरीक्षण किया। उन्होंने घर-घर जाकर चल रहे सर्वे, मकानों के चिन्हांकन और परिवारों से जुटाई जा रही जानकारी की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर ने प्रगणकों और पर्यवेक्षकों द्वारा भरे जा रहे प्रपत्रों की जांच की और कार्य में पारदर्शिता व सटीकता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण की आधारशिला है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही पूरे क्षेत्र के विकास को प्रभावित कर सकती है।

अधिकारियों को निर्देशित करते हुए सरोधन सिंह ने कहा कि जनगणना कार्य पूरी गंभीरता, जिम्मेदारी और तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंकड़ों में त्रुटि या अधूरी जानकारी भविष्य में कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा कर सकती है, इसलिए प्रत्येक जानकारी को सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मकानों के चिन्हांकन, परिवारों के विवरण संकलन और दस्तावेजों के संधारण की प्रक्रिया को भी बारीकी से देखा। कई स्थानों पर उन्होंने प्रगणकों से सीधे चर्चा कर यह समझने की कोशिश की कि मैदानी स्तर पर उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अपर कलेक्टर ने गुणवत्ता बनाए रखने और त्रुटिरहित जानकारी संकलित करने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक है। शासन की कई योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तैयार होती हैं, इसलिए हर कर्मचारी अपने दायित्व का निर्वहन पूरी ईमानदारी और सतर्कता के साथ करे। निरीक्षण के दौरान तहसील और जनगणना शाखा के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे। प्रशासन का दावा है कि जिले में जनगणना कार्य को समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जनगणना में त्रुटिरहित आंकड़ों की बात हो रही है, लेकिन क्या प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए कोई स्वतंत्र सत्यापन प्रणाली बनाई है कि प्रगणकों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सही है?
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार दस्तावेजों और स्थायी पते की समस्याओं से जूझते हैं, ऐसे में छूटे हुए परिवारों या गलत डेटा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
  3. जनगणना को विकास योजनाओं का आधार बताया जा रहा है, लेकिन क्या पिछले वर्षों की जनगणना के आधार पर बनी योजनाओं का लाभ वास्तव में सभी जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंच पाया है?

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