रायसेन; अफसर उतरे तालाब में! रायसेन में श्रमदान कर दिया बड़ा संदेश Aajtak24 News

रायसेन; अफसर उतरे तालाब में! रायसेन में श्रमदान कर दिया बड़ा संदेश Aajtak24 News

रायसेन - जिले में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान और जल संचय जन भागीदारी अभियान-2026 के तहत मंगलवार को प्रशासनिक अमले ने जल संरक्षण को लेकर जमीनी स्तर पर सक्रियता दिखाई। राज्य कार्यालय से पहुंचे प्रभारी जॉइंट कमिश्नर राजीव खरे ने गौहरगंज क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर जल संरचनाओं का निरीक्षण किया और श्रमदान कर लोगों को जल संरक्षण का संदेश दिया। निरीक्षण के दौरान श्री खरे ने ग्राम पंचायत तामोट, बीलखेड़ी और गौहरगंज में बनाए गए वाटर स्ट्रक्चर और जल संरक्षण कार्यों की स्थिति देखी। उन्होंने तालाब सफाई, गहरीकरण और जल संचय से जुड़े कार्यों का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।

ग्राम पंचायत गौहरगंज में तालाब सफाई और गहरीकरण कार्य के दौरान जॉइंट कमिश्नर स्वयं श्रमदान में शामिल हुए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर श्रमदान कर अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिलेभर में पुराने तालाबों, कुओं और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में जल संकट से निपटा जा सके। अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्तर सुधारने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि जल संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जल गंगा संवर्धन अभियान पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी कई गांवों में गर्मी आते ही जल संकट क्यों खड़ा हो जाता है?
  2. तालाब गहरीकरण और सफाई के जिन कार्यों का निरीक्षण किया गया, उनकी गुणवत्ता जांच के लिए क्या कोई स्वतंत्र ऑडिट व्यवस्था है?
  3. क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले वर्षों में जल संरक्षण के नाम पर बने कितने वाटर स्ट्रक्चर आज भी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं और कितने अनुपयोगी हो चुके हैं?

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