| जशपुर पुलिस की हेलमेट रैली ने हजारों लोगों को झकझोरा“, कहा– ‘घर इंतजार करता है, लापरवाही नहीं’ Aajtak24 News |
जशपुर - सड़क हादसों में लगातार हो रही मौतों और गंभीर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जशपुर पुलिस ने जिलेभर में “सुरक्षित सफर–सुरक्षित जीवन” अभियान के तहत बड़ा जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत अलग-अलग थाना और चौकी क्षेत्रों में हेलमेट जागरूकता बाइक रैली निकालकर हजारों लोगों को यातायात नियमों के पालन का संदेश दिया गया।
16 मई 2026 को थाना बागबहार, कांसाबेल, तुमला, लोदाम, आस्ता सहित चौकी ऊपर कछार, पंडरापाठ, मनोरा, कोतबा और करडेगा क्षेत्रों में बाइक रैली निकाली गई। वहीं 17 मई को थाना सन्ना, बगीचा, नारायणपुर, फरसाबहार और चौकी सोनक्यारी क्षेत्र में भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने आम नागरिकों के साथ हेलमेट पहनकर रैली निकाली।
रैली के दौरान पुलिस ने लोगों को संदेश दिया कि सड़क पर सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट पहनने, चारपहिया चालकों से सीट बेल्ट लगाने और शराब पीकर वाहन नहीं चलाने की अपील की गई। साथ ही तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों को चेतावनी देते हुए यातायात नियमों के पालन का संकल्प दिलाया गया।
जशपुर पुलिस ने कहा कि सड़क पर एक छोटी सी गलती किसी परिवार की जिंदगीभर की खुशियां छीन सकती है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि हेलमेट और सीट बेल्ट केवल चालान से बचने का साधन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली सुरक्षा कवच हैं। अभियान के दौरान लोगों को संयमित गति से वाहन चलाने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना पुलिस की प्राथमिकता है और इसके लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बचाने की मुहिम है, जिसे जिलेभर में लगातार चलाया जाएगा।
पुलिस का मानना है कि यदि नागरिक स्वयं जिम्मेदारी के साथ यातायात नियमों का पालन करें, तो कई सड़क हादसों को रोका जा सकता है। यही कारण है कि जशपुर पुलिस अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार बदलने पर भी फोकस कर रही है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- हर साल सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, फिर भी सड़क हादसों और मौतों के आंकड़ों में अपेक्षित कमी क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या केवल रैली निकालना ही समाधान है?
- जिले में बिना हेलमेट, ओवरस्पीड और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर पिछले एक साल में कितनी सख्त कार्रवाई हुई और कितने मामलों में वास्तव में कानूनी प्रभाव दिखा?
- क्या जशपुर पुलिस ने ऐसे ब्लैक स्पॉट या दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान की है, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं? अगर हां, तो वहां स्थायी सुरक्षा इंतजाम अब तक क्यों नहीं किए गए?