| बस्तर; सुशासन का ‘रियलिटी चेक’: कमिश्नर पहुंचे गांव, योजनाओं की फाइल नहीं… जमीनी हकीकत परखी Aajtak24 News |
बस्तर - संभाग के ग्रामीण इलाकों में सुशासन तिहार अब केवल औपचारिक सरकारी आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह योजनाओं की जमीनी पड़ताल और जनता के बीच प्रशासन की सीधी मौजूदगी का माध्यम बनता जा रहा है। बुधवार को जगदलपुर विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी में आयोजित सुशासन शिविर में उस समय प्रशासनिक सक्रियता साफ दिखाई दी, जब बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह खुद शिविर में पहुंचे और विभागीय योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी। कमिश्नर ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से आम जनता द्वारा दिए गए आवेदनों और उनके निराकरण की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भू-स्वामियों को डिजिटल किसान किताब, खसरा और बी-वन की नकल उपलब्ध कराने के साथ वनाधिकार मान्यता पत्रों के फौती-नामांतरण में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई। कमिश्नर ने निर्देशित किया कि प्रत्येक शिविर में स्वास्थ्य जांच अनिवार्य रूप से की जाए और ग्रामीणों को मौके पर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने मोतियाबिंद जांच के लिए नेत्र सहायकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा जरूरतमंद मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन सुविधा से जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही दिव्यांगजनों की जांच कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग और उपकरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। आधार पंजीयन और मोबाइल नंबर सीडिंग की प्रक्रिया को भी शिविर में प्राथमिकता दी गई, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ तकनीकी कारणों से किसी पात्र व्यक्ति तक पहुंचने से न रुके। प्रशासन ने छूटे हुए ग्रामीणों का आधार पंजीयन कराने के भी निर्देश दिए।
महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत सात महिलाओं को लाभान्वित किया गया। वहीं सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के तहत पांच बच्चों का अन्नप्राशन और छह गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की रस्म भी संपन्न कराई गई। शिविर में भावुक माहौल उस समय बना जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत ग्राम पंडरीपानी के धरमू और सुनकी को उनके नए मकानों की चाबियां सौंपी गईं। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रहे इन परिवारों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग ने सात किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग ने किसानों को रागी बीज, आम और ऑयल पाम के पौधे प्रदान कर खेती में नवाचार और वैकल्पिक आय के लिए प्रेरित किया। वहीं मत्स्यपालन विभाग ने दो हितग्राहियों को मछली पालन के लिए जाल वितरित किए।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड, वय वंदन कार्ड और सिकलिन कार्ड जारी कर स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया। खाद्य विभाग द्वारा 14 परिवारों को नए राशन कार्ड प्रदान किए गए, जबकि राजस्व विभाग ने जाति प्रमाण पत्र वितरित किए। शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी मंच पर सम्मानित किया गया। आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों में रहकर 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 11 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिली। पशुधन विकास विभाग ने सूकरपालन को बढ़ावा देने के लिए हितग्राहियों को अनुदान राशि भुगतान के प्रमाण पत्र वितरित किए। इस दौरान जनपद पंचायत जगदलपुर अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें एक ही स्थान पर इतनी योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिला है, जिससे सरकारी व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा मजबूत हुआ है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सुशासन शिविरों में योजनाओं का लाभ बांटने के बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन क्या प्रशासन यह बताएगा कि जिन पात्र ग्रामीणों के आवेदन वर्षों से लंबित हैं, उनकी जवाबदेही किस अधिकारी की तय की गई?
- कमिश्नर ने खुद जमीनी हकीकत परखी, तो क्या इसका मतलब यह माना जाए कि विभागीय रिपोर्टों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है, जिसकी वजह से वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे गांव पहुंचना पड़ रहा है?
- हर शिविर में स्वास्थ्य जांच और आधार पंजीयन जैसे निर्देश दिए जा रहे हैं, तो क्या यह स्वीकारोक्ति नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाएं अब तक प्रभावी तरीके से उपलब्ध नहीं हो पाई हैं?