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| सिंगरौली; कलेक्टर मौके पर… निरीक्षण के बाद वेतन कटौती और व्यवस्था सुधार का अल्टीमेटम Aajtak24 News |
सिंगरौली - जिला पशु चिकित्सालय बैढ़न में बुधवार को हुए औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने समयपालन और उपचार व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया। कलेक्टर गौरव बैनल ने अस्पताल और परिसर में संचालित एनिमल रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने समय पर उपस्थित न होने को गंभीरता से लेते हुए वेटनरी डॉक्टर शिल्पी पटेल का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। साथ ही उपसंचालक पशुपालन विभाग को अस्पताल की कार्यप्रणाली और सेवाओं में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सभी चिकित्सक निर्धारित समय पर अस्पताल में मौजूद रहें और घायल तथा बीमार पशुओं के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक हर समय उपलब्ध रखा जाए। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही सीधे पशु कल्याण को प्रभावित करती है। निरीक्षण के दौरान एनिमल रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्था भी देखी गई। यहां बेसहारा और घायल पशुओं की देखभाल, उपचार और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने पशुपालन विभाग को गौसेवा संस्थाओं के साथ समन्वय बढ़ाने और हरसंभव सहयोग देने के निर्देश दिए।
भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर ने रेस्क्यू सेंटर में मौजूद पशुओं को राहत देने के लिए फॉगर मशीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। साथ ही जिले में पशु कल्याण को लेकर पशु क्रूरता निवारण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए, जिसमें पशुपालन, नगर निगम, वन और राजस्व विभाग के साथ गौसेवा संस्थाएं भी शामिल होंगी। निरीक्षण के दौरान उपसंचालक पशुपालन विभाग डॉ. जितेंद्र प्रजापति और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि आगे भी संस्थागत व्यवस्थाओं की निगरानी जारी रहेगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. एक डॉक्टर का वेतन काटने की कार्रवाई हुई, लेकिन क्या अस्पताल में समयपालन और सेवा गुणवत्ता को लेकर नियमित मॉनिटरिंग सिस्टम पहले से मौजूद था, और यदि था तो लापरवाही पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?
2. घायल पशुओं के लिए दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए— क्या निरीक्षण में दवाओं की वास्तविक कमी मिली थी या यह एहतियाती निर्देश था?
3. एनिमल रेस्क्यू सेंटर और गौशालाओं के सुधार की बात हो रही है— क्या जिले में पशुओं की क्षमता, उपचार दर और मृत्यु दर से जुड़ा कोई सार्वजनिक डेटा उपलब्ध कराया जाएगा ताकि सुधार की वास्तविक स्थिति सामने आ सके?
