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| उज्जैन जनसुनवाई में खुली शिकायतों की परतें: नामांतरण अटका, जमीन पर कब्जा और जल संकट पर कलेक्टर सख्त Aajtak24 News |
उज्जैन - उज्जैन में मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में कई गंभीर शिकायतें सामने आईं, जिनमें भूमि नामांतरण में देरी, अवैध कब्जा, जल संकट और धमकी जैसे मामलों ने प्रशासन का ध्यान खींचा। कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह ने प्रशासनिक संकुल भवन में लोगों की समस्याएं सुनकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
नामांतरण अटका, किसान परेशान
घट्टिया निवासी सुरेश सोलंकी ने शिकायत की कि उन्होंने अपनी पैतृक कृषि भूमि के नामांतरण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन लंबे समय बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस पर कलेक्टर ने एसडीएम घट्टिया को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए और प्रकरण को प्राथमिकता से निपटाने को कहा।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप
केशव नगर के रहवासियों ने शिकायत की कि कुछ लोगों ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण कर लिया है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और क्षेत्र में भय का माहौल है।इस गंभीर मामले पर तहसीलदार उज्जैन शहर को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
जल संकट से परेशान लोग
वार्ड क्रमांक 23 के दादा भाई नौरोजी नगर के निवासियों ने शिकायत की कि क्षेत्र में लंबे समय से जल संकट बना हुआ है। नलों में पानी बेहद कम दबाव से आता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इस पर नगर निगम के जोनल अधिकारी को तत्काल जांच और सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
निजी भूमि पर कब्जा और धमकी का मामला
उज्जैन निवासी पुरुषोत्तम सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पड़ोसी ने उनकी निजी भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण कर लिया है। विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम आयुक्त को जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासनिक संदेश: शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का दावा
जनसुनवाई में आए मामलों को देखकर यह स्पष्ट किया गया कि प्रशासन अब भूमि विवाद, अवैध कब्जे और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर तेजी से कार्रवाई करेगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व काम महीनों तक अटके हैं, तो क्या यह सिस्टम की नियमित कार्यप्रणाली की विफलता नहीं है?
- शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायतें लगातार क्यों आ रही हैं—क्या शुरुआती स्तर पर ही निगरानी व्यवस्था कमजोर है?
- जल संकट और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं हर जनसुनवाई में क्यों दोहराई जाती हैं—क्या इनका कोई स्थायी समाधान मॉडल अब तक नहीं बन पाया है?
