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| रतलाम; गर्भवती महिलाओं की जांच पर सख्ती: 12 सप्ताह में अनिवार्य जांच नहीं तो कार्रवाई के संकेत Aajtak24 News |
रतलाम - जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जिला स्वास्थ्य समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति, टीकाकरण, पोषण और गंभीर बीमारियों की रोकथाम को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि गर्भवती महिलाओं की पहली जांच हर हाल में गर्भ के 12 सप्ताह के भीतर सुनिश्चित की जाए, ताकि समय पर जोखिमों की पहचान कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सके।
मातृ स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्ट तैयार की जाए
- अनुमानित प्रसव तिथि के आधार पर समय पर भर्ती सुनिश्चित की जाए
- बर्थ वेटिंग रूम में समय रहते प्रवेश की व्यवस्था हो
- महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय बढ़ाया जाए
उन्होंने कहा कि मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए मैदानी स्तर पर सख्त निगरानी जरूरी है।
लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति कम है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
टीबी, मलेरिया और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा
बैठक में कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा भी की गई, जिनमें शामिल हैं:
- टीबी मुक्त भारत अभियान
- मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम
- सिकल सेल स्क्रीनिंग
- टीकाकरण अभियान
- नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (SNCU)
- नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज नियंत्रण
- टेली-कंसल्टेशन सेवाएं
- अंधत्व नियंत्रण और IDSP निगरानी
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि टीबी मरीजों की अधिक से अधिक स्क्रीनिंग कर उन्हें तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाए।
विभागीय समन्वय पर जोर
बैठक में यह भी तय किया गया कि:
- जिला स्वास्थ्य समिति और पोषण समिति की संयुक्त बैठक होगी
- स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर काम करेंगे
- हर सप्ताह मैदानी कार्यों की समीक्षा की जाएगी
बैठक का मुख्य संदेश
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, समय पर जांच और मातृ-शिशु सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब रिपोर्टिंग नहीं, नतीजे दिखने चाहिए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर गर्भवती महिलाओं की पहली जांच 12 सप्ताह के भीतर अनिवार्य की जा रही है, तो क्या अब तक बड़ी संख्या में महिलाएं इस समयसीमा से बाहर रहकर जोखिम में थीं?
- हर बैठक में समन्वय की बात होती है, लेकिन क्या स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभागों के बीच वास्तविक फील्ड लेवल पर तालमेल कमजोर नहीं है?
- कम उपलब्धि पर कार्रवाई के निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन क्या सिस्टम में निगरानी और जवाबदेही की स्थायी व्यवस्था न होने से समस्याएं बार-बार दोहराई जा रही हैं?
