![]() |
| रीवा पुलिस का 'पॉकेट गवाह' निकला नशे का किंगपिन: खाकी के संरक्षण में पल रहा था कफ सिरप का काला कारोबार! Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले में पुलिस और अपराधियों के बीच के 'नापाक गठजोड़' का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस युवक को पुलिस सालों से अदालतों और थानों में 'पॉकेट गवाह' की तरह इस्तेमाल करती रही, वही युवक पुलिस की नाक के नीचे नशीली कफ सिरप का साम्राज्य चला रहा था। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) डॉ. रितु उपाध्याय के विशेष दस्ते ने एक बड़ी कार्यवाही करते हुए इस 'सरकारी गवाह' और उसकी महिला मित्र को भारी मात्रा में नशीली खेप के साथ दबोच लिया है।
छापेमारी में ६०० शीशी नशीली सिरप बरामद
मंगलवार देर शाम CSP के विशेष दस्ते ने गुप्त सूचना के आधार पर सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने मोहन जोशी उर्फ भूपेश और उसकी एक महिला सहयोगी को गिरफ्तार किया। तलाशी में इनके पास से ६०० शीशी प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप बरामद हुई है। इस बरामदगी ने पुलिस विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि आरोपी मोहन जोशी कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस का पुराना और 'भरोसेमंद' गवाह रहा है।
माँ का सनसनीखेज खुलासा: "पुलिस ने दी नशे की पहली खेप"
गिरफ्तारी के बाद इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब आरोपी की माँ ने पुलिस पर ही उसे अपराधी बनाने का सीधा आरोप जड़ दिया। माँ का कहना है कि मोहन थाने के पास चाय की दुकान चलाता था। पुलिसकर्मी न केवल उससे झूठी गवाहियां दिलवाते थे, बल्कि थाने में जब्त किया गया माल (नशीली सामग्री) उसे बेचने के लिए देकर इस अवैध धंधे में धकेला गया। यह आरोप रीवा पुलिस के उन 'जयचंदों' की पोल खोलता है जो अपराधियों को पकड़ने के बजाय खुद अपराध की फसल बो रहे हैं।
'पॉकेट गवाह' का खेल और थानों में सेटिंग
सूत्रों की मानें तो रीवा और मऊगंज जिले के कई थानों में 'पॉकेट गवाह' का कल्चर हावी है। मोहन जोशी जैसे लोग १०० से अधिक मामलों में पुलिस के गवाह बने हुए थे। सवाल यह है कि:
जो व्यक्ति पुलिस का मुखबिर और गवाह था, वह इतना बड़ा तस्कर कैसे बन गया?
क्या सिविल लाइंस थाने के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी?
क्या पुलिस केवल आंकड़े बढ़ाने के लिए खुद नशा बिकवाती है?
चर्चा है कि सीमावर्ती थानों के कई पुलिसकर्मी नशा तस्करों से सांठगांठ कर मलाईदार पोस्टिंग पाते हैं और 'ऊपर तक' हिस्सा पहुंचाकर चैन की नींद सोते हैं।
कड़ी कार्यवाही का आश्वासन
इस पूरे मामले पर नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. रितु उपाध्याय का कहना है कि ६०० शीशी सिरप के साथ दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की गंभीरता से जाँच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विभाग का कोई भी कर्मचारी इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
जनता का भरोसा दांव पर
नशे के खिलाफ रीवा पुलिस का अभियान अपनी जगह है, लेकिन जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? मोहन जोशी की गिरफ्तारी केवल एक तस्कर की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह रीवा पुलिस के तंत्र में फैले उस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश है जो समाज की रगों में जहर घोल रहा है।
