
हरदा; सरकारी योजनाएं अब गांव-गांव ‘डोर स्टेप’ पर! हरदा के 103 गांवों में लगेगा योजनाओं का महाकैंप Aajtak24 News
हरदा - जिले में जनजातीय समुदायों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कृष्ट अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान’ के तहत 18 से 25 मई 2026 तक जिले में “जनभागीदारी सप्ताह” आयोजित किया जाएगा। इस दौरान जिले के 103 चयनित गांवों में लाभार्थी संतुष्टि शिविर लगाए जाएंगे, जहां आदिवासी समुदाय के पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा। अभियान की थीम “जनभागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले” रखी गई है, जिसका उद्देश्य दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना है।
जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग के अनुसार, इन शिविरों में आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र, जनधन खाता, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और वन अधिकार पट्टा जैसी योजनाओं से लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के तहत पीएम राष्ट्रीय डायलिसिस प्रोग्राम, पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान, सिकल सेल मिशन और क्षय रोग उन्मूलन जांच जैसी सुविधाएं भी शिविरों में उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन का दावा है कि इससे आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
कार्यक्रम के तहत 18 मई को कलेक्ट्रेट में अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के अधिकारियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके बाद 19 से 25 मई तक गांव-गांव में संतृप्ति और स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे। 20 मई को “ग्राम इमर्शन ड्राइव” के तहत अधिकारी, कर्मयोगी और गैर सरकारी संगठन गांवों में ट्रांसेक्ट वॉक करेंगे। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया जाएगा, जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और जनसुनवाई की तारीखें घोषित की जाएंगी।
वहीं 21 से 23 मई तक शिकायत निवारण और त्वरित समाधान के लिए प्रतिदिन जनसुनवाई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रशासन का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और आदिवासी समुदाय की समस्याओं का मौके पर समाधान करना है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- हर साल शिविर और अभियान चलाए जाते हैं, फिर भी आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग आधार, राशन और आयुष्मान जैसी मूल योजनाओं से वंचित क्यों रहते हैं?
- क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछले अभियानों में कितने लोगों को वास्तविक लाभ मिला और कितनी शिकायतें अब भी लंबित हैं?
- जनसुनवाई और ट्रांसेक्ट वॉक के दौरान सामने आने वाली समस्याओं के समाधान की समय-सीमा क्या होगी, या यह अभियान भी केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगा?