भिण्ड में जल संसाधन विभाग की समीक्षा: बारिश से पहले नहरों की मरम्मत के सख्त निर्देश Aajtak24 News

भिण्ड में जल संसाधन विभाग की समीक्षा: बारिश से पहले नहरों की मरम्मत के सख्त निर्देश Aajtak24 News

भिण्ड - भिण्ड में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर ने की, जिसमें जिले की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

कनेरा उद्वहन सिंचाई एवं पेयजल योजना पर फोकस

बैठक में कनेरा उद्वहन सिंचाई एवं पेयजल योजना की भौतिक प्रगति, कार्य पूर्णता की समयसीमा और निर्माण में हो रही देरी के कारणों पर चर्चा की गई।

कलेक्टर ने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से पूछा कि:

  • परियोजना में देरी क्यों हो रही है
  • काम की वास्तविक प्रगति क्या है
  • क्रियान्वयन में बाधाएं कौन सी हैं

पाइपलाइन और तकनीकी गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

कलेक्टर ने पाइपलाइन निर्माण कार्य में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि:

  • पाइप के सभी जॉइंट मजबूत और मानक अनुसार हों
  • भविष्य में लीकेज की कोई समस्या न आए
  • कार्य में तकनीकी गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए

बारिश से पहले नहरों की मरम्मत अनिवार्य

कलेक्टर ने सबसे महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि:

  • नहरों और कैनाल के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत बारिश से पहले पूरी की जाए
  • किसी भी स्थिति में जल प्रवाह बाधित न हो
  • मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता देकर समयसीमा में पूरा किया जाए

अतिक्रमण हटाने और हरियाली बढ़ाने पर भी जोर

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि:

  • नहर की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए
  • खाली पड़ी नहर भूमि पर पौधारोपण किया जाए
  • भूमि रिकॉर्ड में विभाग का नाम दर्ज कराया जाए
  • राजस्व नक्शे में सही रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाए

प्रशासनिक संदेश: “सिंचाई व्यवस्था में कोई ढिलाई नहीं”

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सिंचाई और पेयजल व्यवस्था किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर हर साल बारिश से पहले नहरों की मरम्मत के निर्देश देने पड़ते हैं, तो क्या यह स्थायी रखरखाव व्यवस्था की विफलता नहीं दर्शाता?
  2. नहर भूमि पर अतिक्रमण बार-बार क्यों सामने आता है—क्या रिकॉर्डिंग और निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां हैं?
  3. कनेरा जैसी बड़ी योजनाओं में देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने की कोई ठोस व्यवस्था है, या केवल समीक्षा बैठकों तक ही प्रक्रिया सीमित रह जाती है?

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