उमरिया जनसुनवाई में 92 शिकायतों का अंबार: ओलावृष्टि से लेकर बिजली-बिल और आवास तक पर प्रशासन सक्रिय Aajtak24 News

 उमरिया जनसुनवाई में 92 शिकायतों का अंबार: ओलावृष्टि से लेकर बिजली-बिल और आवास तक पर प्रशासन सक्रिय Aajtak24 News

उमरिया - जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में इस बार 92 नागरिकों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई इस सुनवाई में भूमि विवाद, राजस्व प्रकरण, पेंशन, आवास, बिजली और पानी से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रकरण का समय-सीमा में और संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त मकानों पर मदद की मांग

महोबादादर क्षेत्र के कई नागरिकों ने ओलावृष्टि से मकानों को हुए नुकसान के लिए आर्थिक सहायता की मांग की।

आवेदकों में शामिल रहे:

  • गुड्डी बाई
  • छोटे सिंह
  • कामता
  • सुनील

इन सभी ने क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा राशि देने की मांग प्रशासन से की।

भुगतान, योजना लाभ और वेतन अटके मामले भी उठे

जनसुनवाई में कई आर्थिक और योजना संबंधी शिकायतें भी सामने आईं:

  • अमृत सरोवर तालाब कार्य का भुगतान लंबित
  • कूप निर्माण की राशि न मिलने की शिकायत
  • दो माह का वेतन अटका होने का मामला
  • प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किश्त न मिलने की मांग

बिजली, किसान सम्मान निधि और योजना लाभ की शिकायतें

अन्य प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे:

  • बिजली बिल में सुधार
  • किसान सम्मान निधि की राशि न मिलना
  • लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिलाने की मांग

प्रशासन का फोकस: “जनसुनवाई = त्वरित समाधान”

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:

  • सभी आवेदन प्राथमिकता से निपटाए जाएं
  • दूर-दराज से आए नागरिकों को बार-बार परेशान न होना पड़े
  • योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचे

जनसुनवाई स्थल पर बैठने और पेयजल की व्यवस्था भी की गई थी ताकि नागरिकों को असुविधा न हो।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर हर जनसुनवाई में ओलावृष्टि मुआवजा, आवास किश्त और वेतन जैसे बुनियादी मुद्दे सामने आ रहे हैं, तो क्या यह सिस्टम की नियमित वितरण क्षमता पर सवाल नहीं है?
  2. क्या अमृत सरोवर और कूप निर्माण जैसी योजनाओं में भुगतान लंबित रहना यह दिखाता है कि फील्ड लेवल पर वित्तीय प्रक्रिया बेहद धीमी और जटिल है?
  3. किसान सम्मान निधि और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं के लिए भी आवेदन क्यों लग रहे हैं—क्या लाभ वितरण प्रणाली अब भी पूरी तरह ऑटोमैटिक और त्रुटिरहित नहीं हो पाई है?

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