| बिलासपुर; चापड़ हमला, सड़ता फेफड़ा और मौत से जंग… सिम्स के डॉक्टरों ने 15 दिन वेंटिलेटर पर रख बचाई जिंदगी Aajtak24 News |
बिलासपुर - स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और जीवन-मृत्यु से जुड़ी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक गंभीर रूप से घायल महिला की जान बचा ली। तखतपुर निवासी 45 वर्षीय उषा दिवाकर पर हुए जानलेवा चापड़ हमले के बाद उनकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच गया और सांस लेना तक मुश्किल हो गया था। लेकिन सिम्स के डॉक्टरों की टीम ने समय रहते जटिल ऑपरेशन कर मरीज को नया जीवन दे दिया। जानकारी के अनुसार 6 अप्रैल 2026 को उषा दिवाकर पर चापड़ से हमला किया गया था। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। शुरुआत में सामान्य इलाज के बाद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। बाद में गंभीर अवस्था में उन्हें सिम्स अस्पताल लाया गया, जहां जांच में सामने आया कि चोट और संक्रमण के कारण उनके दाएं फेफड़े के बाहर बड़ी मात्रा में पस जमा हो गया है।
डॉक्टरों के मुताबिक संक्रमण तेजी से फैल रहा था और मरीज का दायां फेफड़ा लगभग पूरी तरह संक्रमित हो चुका था। लगातार पस बनने और सांस लेने में दिक्कत के कारण मरीज की हालत बेहद नाजुक हो गई थी। स्थिति को देखते हुए जनरल सर्जरी विभाग ने तत्काल ऑपरेशन का फैसला लिया। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओ. पी. राय के नेतृत्व में डॉ. विनोद ताम्रकार, डॉ. कमलेश प्रसाद देवांगन और डॉ. सुनील पात्रे की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। वहीं एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के मार्गदर्शन में डॉ. मुनीता जायसवाल, डॉ. नेहा दुबे और डॉ. शीतल दास ताम्रकार ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
लंबे समय तक चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने फेफड़े के बाहर जमा पस को बाहर निकाला और संक्रमित हिस्से का उपचार किया। ऑपरेशन के बाद मरीज को पोस्ट आईसीयू में भर्ती कर करीब 15 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इस दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की लगातार निगरानी और इलाज से मरीज की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है। मरीज के परिजनों ने सिम्स अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ के प्रति आभार जताया है।
सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. ओ. पी. राय ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी और संक्रमण लगातार बढ़ रहा था। समय पर ऑपरेशन और सतत निगरानी के कारण मरीज को बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि अब सिम्स में जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुभवी टीम लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक और समय पर सही निर्णय ने मरीज को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इसे पूरी चिकित्सा टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताते हुए कहा कि सिम्स में अब जटिल सर्जरी और आपातकालीन उपचार की सुविधाएं प्रभावी तरीके से उपलब्ध हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल पा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- अगर मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी और संक्रमण फेफड़े तक पहुंच गया था, तो क्या शुरुआती इलाज में कहीं लापरवाही या देरी हुई, जिसकी वजह से स्थिति इतनी गंभीर बनी?
- सिम्स में जटिल सर्जरी की सफलता का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या अस्पताल के पास ऐसे गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त ICU बेड, वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध हैं, या यह केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित है?
- चापड़ हमले जैसे गंभीर मामलों में मेडिकल और पुलिस समन्वय कितना प्रभावी है, और क्या ऐसे हिंसक मामलों में पीड़ितों के लिए तत्काल ट्रॉमा केयर सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत नहीं है?