रतलाम में टीकाकरण केंद्र पर ‘सरप्राइज चेक’: गर्भवती महिलाओं से लेकर कुपोषित बच्चों तक की हुई पड़ताल Aajtak24 News

रतलाम में टीकाकरण केंद्र पर ‘सरप्राइज चेक’: गर्भवती महिलाओं से लेकर कुपोषित बच्चों तक की हुई पड़ताल Aajtak24 News

रतलाम - जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने संयुक्त निरीक्षण अभियान शुरू किया है। कलेक्टर मिशा सिंह के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रतलाम शहर के वार्ड क्रमांक 10 स्थित सुयोग परिसर में संचालित टीकाकरण केंद्र का निरीक्षण किया। संयुक्त निरीक्षण के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधौलिया और प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने टीकाकरण व्यवस्था, पोषण सेवाओं और कुपोषित बच्चों के उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।

अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की “ड्यू लिस्ट” का परीक्षण किया तथा यह देखा कि निर्धारित समय पर टीकाकरण हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दिए जा रहे पोषण आहार की गुणवत्ता और उपलब्धता की भी जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की प्रक्रिया की भी मॉनिटरिंग की गई। अधिकारियों ने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिए कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए।

टीम ने यह भी जांचा कि टीकाकरण सेवाएं शासन द्वारा तय प्रोटोकॉल के अनुसार दी जा रही हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव बोरीवाल, सीडीपीओ, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शहरी आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के संयुक्त निरीक्षण का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड देखना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि टीकाकरण और पोषण सेवाएं नियमित रूप से चल रही हैं, तो जिले में अब भी कुपोषित बच्चों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही है?
  2. क्या निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की कमी या लापरवाही सामने आई, और यदि हां तो संबंधित कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
  3. टीकाकरण केंद्रों पर व्यवस्थाओं की समीक्षा होती रहती है, लेकिन क्या प्रशासन के पास यह आंकड़ा है कि कितने बच्चे अब भी पूर्ण टीकाकरण से वंचित हैं?

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