![]() |
| खरगोन में एक ही बैठक में तय हुआ बच्चों और माताओं के भविष्य का रोडमैप Aajtak24 News |
खरगोन - जिले में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, कुपोषण नियंत्रण और विभागीय समन्वय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजनाओं की प्रगति, जमीनी चुनौतियों और सुधार की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सबसे पहले गर्भवती महिलाओं के डेटा की शुद्धता और दोनों विभागों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए ताकि किसी भी पात्र महिला को सेवाओं से वंचित न रहना पड़े। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम को घर-घर संपर्क कर संस्थागत प्रसव के लिए महिलाओं को प्रेरित करने को कहा गया।
कलेक्टर ने बीएमओ को निर्देश दिए कि प्रसव वाली महिलाओं की सूची नियमित रूप से सीडीपीओ को उपलब्ध कराई जाए और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के जन्म के बाद कम से कम छह माह तक उनकी नियमित निगरानी करें। बैठक में छह माह तक के बच्चों के लिए पूरक पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और समय पर अस्पताल में भर्ती सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। कुपोषण नियंत्रण को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। निर्देश दिए गए कि सभी बच्चों की सूची बनाकर नियमित मॉनिटरिंग की जाए और गंभीर कुपोषित बच्चों को समय पर पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में भर्ती कराया जाए। आरबीएसके टीम और सुपरवाइजर को आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर आवश्यक मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वीएचएसएनडी दिवस के दौरान संयुक्त विजिट, मंगलवार और शुक्रवार को सुपरवाइजर निरीक्षण तथा यू-विन पोर्टल पर उसी दिन पंजीयन और टीकाकरण डेटा अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए। सैम और मैम बच्चों के लिए पंचायत स्तर पर माइक्रो प्लान तैयार कर कवरेज सुधारने पर भी जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना की प्रगति का भी आकलन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत हितग्राहियों को नियमित रूप से पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जाए और 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों का पंजीयन सुनिश्चित कर उन्हें शाला-पूर्व शिक्षा से जोड़ा जाए।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बाल विवाह मुक्त ग्राम अभियान को लेकर रहा। महेश्वर परियोजना के अंतर्गत ग्राम बागसोमाखेड़ी को इस पहल के लिए चयनित किया गया। इसके लिए निगरानी समिति का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य केवल बाल विवाह रोकना नहीं बल्कि कम उम्र में गर्भधारण रोकना, शिक्षा को बढ़ावा देना, स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस शिक्षा से जोड़ना और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना भी होगा। इसके लिए जनजागरूकता रैली और करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और विभागीय समन्वय को परिणाम आधारित बनाया जाए।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. मातृ-शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण पर लगातार समीक्षा बैठकों के बावजूद जिले में पिछले एक वर्ष में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और गंभीर कुपोषण के वास्तविक आंकड़ों में कितना सुधार हुआ?
2. बाल विवाह मुक्त ग्राम के लिए बागसोमाखेड़ी का चयन किया गया है, लेकिन किन मानकों के आधार पर इस गांव को चुना गया और क्या जिले के अन्य संवेदनशील गांवों का भी कोई रोडमैप तैयार है?
3. गर्भवती महिलाओं के डेटा सत्यापन और यू-विन पोर्टल अपडेट के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर डेटा गलत या अपूर्ण पाया जाता है तो जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी?
