| बस्तर में खेल प्रतिभाओं को निखारने का बड़ा अभियान, मैदानों में गूंज रहा युवाओं का जोश Aajtak24 News |
जगदलपुर - बस्तर जिले में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से नई खेल प्रतिभाओं को तराशने का व्यापक अभियान चल रहा है। इस शिविर में बड़ी संख्या में सब-जूनियर और जूनियर वर्ग के बालक-बालिकाएं हिस्सा लेकर अपने खेल कौशल को निखार रहे हैं। यह प्रशिक्षण शिविर 06 मई से शुरू होकर 26 मई तक चलेगा, जिसमें खिलाड़ियों को सुबह और शाम दो पालियों में नियमित अभ्यास कराया जा रहा है। सुबह 6 बजे से 8 बजे तक और शाम 5 बजे से 7 बजे तक चलने वाले इन सत्रों में खिलाड़ी पूरे उत्साह के साथ अभ्यास कर रहे हैं।
शिविर का संचालन विभिन्न खेल परिसरों में किया जा रहा है, जहां हर मैदान को अलग-अलग खेलों के लिए समर्पित किया गया है। इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में बैडमिंटन, शतरंज, टेनिस, बास्केटबॉल, कराटे, जूडो, फुटबॉल, वेटलिफ्टिंग, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसे खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्रीड़ा परिसर धरमपुरा में कबड्डी, तीरंदाजी और हैंडबॉल के खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं, जबकि पंडरीपानी स्थित हॉकी प्रशिक्षण केंद्र में हॉकी का विशेष प्रशिक्षण चल रहा है। इसके अलावा पुलिस लाइन में वॉलीबॉल, बस्तर हाई स्कूल में सॉफ्टबॉल और शहीद पार्क के पीछे कराटे की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
रोमांच और साहसिक खेलों को बढ़ावा देते हुए इंद्रावती नदी के पुराने पुल के पास कयाकिंग और कैनोइंग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वहीं सिटी ग्राउंड डिमरापाल, लालबाग ग्राउंड और घाटलोहंगा स्कूल मैदान में फुटबॉल और रग्बी का अभ्यास लगातार जारी है। कोच और अनुभवी खिलाड़ियों द्वारा बच्चों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ अनुशासन और खेल भावना की भी सीख दी जा रही है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
शिविर का समापन 26 मई को एक भव्य समारोह के साथ होगा, जिसमें सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक खेल से एक बालक और एक बालिका को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। यह अभियान बस्तर की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या इतने बड़े खेल प्रशिक्षण शिविर के बाद भी खिलाड़ियों को साल भर निरंतर कोचिंग और सुविधाएं मिलेंगी, या यह सिर्फ 21 दिन का इवेंट बनकर रह जाएगा?
- बस्तर जैसे क्षेत्रों में प्रतिभाएं तो हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए चयन, स्पॉन्सरशिप और एक्सपोजर की ठोस नीति क्या है?
- क्या ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी समान अवसर मिल रहे हैं, या चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की असमानता बनी हुई है?