दुर्ग; अब फाइल नहीं, डिजिटल नक्शा तय करेगा विकास: दुर्ग में अफसरों को मिला ‘स्मार्ट प्लानिंग’ का नया हथियार Aajtak24 News

दुर्ग; अब फाइल नहीं, डिजिटल नक्शा तय करेगा विकास: दुर्ग में अफसरों को मिला ‘स्मार्ट प्लानिंग’ का नया हथियार Aajtak24 News

दुर्ग - जिले में विकास कार्यों की योजना अब पारंपरिक फाइलों और लंबे सर्वेक्षणों तक सीमित नहीं रहेगी। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी पीएम गति शक्ति पोर्टल के जरिए अब जिला प्रशासन डिजिटल डेटा और स्मार्ट मैपिंग के आधार पर विकास योजनाओं को गति देगा। इसी उद्देश्य से बुधवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में पीएम गति शक्ति पोर्टल को लेकर एक विस्तृत कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों को इस आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी दी गई। कार्यशाला में अपर कलेक्टर श्रीमती योगिता देवांगन, वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उद्योग संचालनालय की मास्टर ट्रेनर श्रीमती मौसमी राहा, उप संचालक कुमुद मिश्रा, सहायक संचालक अनुभूति श्रेया और सलाहकार प्रिया ने अधिकारियों को पोर्टल के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया।

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि पीएम गति शक्ति एक राष्ट्रीय डिजिटल मास्टर प्लान है, जिसे उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार के मार्गदर्शन में भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस एप्लीकेशन एंड जियो इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) द्वारा विकसित किया गया है। छत्तीसगढ़ में इसका नोडल विभाग वाणिज्य एवं उद्योग विभाग को बनाया गया है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह पोर्टल एक स्मार्ट इंटरएक्टिव मैप की तरह काम करता है, जिसमें सड़कें, रेलवे लाइनें, नदियां, जंगल, गांव, अस्पताल, स्कूल, बिजली लाइनें, खदानें और अन्य सरकारी डेटा लेयर एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहती हैं। इससे अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन और संसाधनों के आकलन में काफी आसानी होगी।

कार्यशाला में उदाहरण देकर समझाया गया कि अब जिला प्रशासन यह आसानी से पता लगा सकेगा कि किसी गांव से सबसे नजदीकी अस्पताल कितनी दूरी पर है, किसी खदान के आसपास कौन-कौन से गांव आते हैं, या किसी आदिवासी बस्ती को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए कौन-सा रूट सबसे उपयुक्त होगा। इससे विकास योजनाओं के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक सटीक बनने की उम्मीद जताई गई।

अधिकारियों को बताया गया कि पहले जिन कार्यों के लिए कई दिनों या हफ्तों तक फील्ड सर्वेक्षण करना पड़ता था, अब वही विश्लेषण कुछ घंटों में डिजिटल डेटा के जरिए किया जा सकेगा। इससे परियोजनाओं की योजना, निगरानी और समन्वय में पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास कार्यों में समय व संसाधनों की बचत होगी। प्रशासन का मानना है कि पीएम गति शक्ति पोर्टल के प्रभावी उपयोग से जिले में बुनियादी ढांचे, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी। साथ ही विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं के दोहराव और संसाधनों की बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. पीएम गति शक्ति पोर्टल को विकास का बड़ा डिजिटल समाधान बताया जा रहा है, लेकिन क्या जिले के सभी विभागों के पास इसे प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है?
  2. अगर यह पोर्टल इतनी सटीक और तेज योजना बनाने में सक्षम है, तो अब तक जिन विकास परियोजनाओं में देरी, गलत प्लानिंग या बजट की बर्बादी हुई, उसकी जवाबदेही किसकी मानी जाएगी?
  3. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अब भी इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी की समस्या बनी हुई है। ऐसे में क्या यह हाईटेक पोर्टल जमीनी स्तर पर वास्तव में प्रभावी साबित होगा या केवल प्रस्तुति तक सीमित रह जाएगा?

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