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| नर्मदापुरम; सांसद दर्शन चौधरी के प्राकृतिक कृषि बिल को राष्ट्रपति की हरी झंडी Aajtak24 News |
नर्मदापुरम - देश में प्राकृतिक खेती को लेकर अब संसद में बड़ी बहस की तैयारी शुरू हो गई है। नर्मदापुरम-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा प्रस्तुत निजी सदस्य विधेयक “द प्रमोशन ऑफ नेचुरल एग्रीकल्चर बिल, 2025” को राष्ट्रपति की अनुशंसा मिल गई है। इसके बाद अब इस विधेयक को लोकसभा में विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। लोकसभा सचिवालय और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 117(3) के अंतर्गत राष्ट्रपति महोदया ने इस विधेयक पर सदन में विचार किए जाने की मंजूरी प्रदान की है। इस घटनाक्रम को प्राकृतिक खेती को संस्थागत समर्थन देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में खेती की बढ़ती लागत, रासायनिक खादों पर निर्भरता और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति किसानों के सामने गंभीर चुनौती बन चुकी है। ऐसे में प्राकृतिक खेती ही किसानों को कम लागत और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की ओर ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों को ऐसी खेती के लिए प्रेरित करेगा जो पर्यावरण के अनुकूल हो, भूमि की गुणवत्ता को बेहतर बनाए और उत्पादन लागत को कम करे। सांसद ने दावा किया कि यदि प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिला तो इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
सांसद ने इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व को देते हुए कहा कि केंद्र सरकार लगातार जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan तथा राष्ट्रपति के प्रति आभार भी व्यक्त किया। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है तो देश में खेती के पारंपरिक मॉडल और रासायनिक कृषि पर नई बहस शुरू हो सकती है। हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से पहले किसानों को बाजार, उत्पादन और आय सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था देना भी जरूरी होगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात तो हो रही है, लेकिन क्या सरकार यह गारंटी दे सकती है कि इससे किसानों की उपज और आय प्रभावित नहीं होगी, खासकर छोटे किसानों की?
- यदि प्राकृतिक खेती इतनी प्रभावी है, तो अब तक कृषि नीति और सरकारी सब्सिडी का बड़ा हिस्सा रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर ही क्यों केंद्रित रहा?
- क्या इस विधेयक के साथ किसानों के लिए प्राकृतिक उत्पादों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या बाजार गारंटी जैसी कोई ठोस व्यवस्था भी प्रस्तावित की जाएगी, या किसान केवल प्रयोग का हिस्सा बनकर रह जाएंगे?
