कांकेर; कलेक्टर ने अंदरूनी इलाकों में पुल-पुलियों का किया औचक निरीक्षण Aajtak24 News

कांकेर; कलेक्टर ने अंदरूनी इलाकों में पुल-पुलियों का किया औचक निरीक्षण Aajtak24 News

कांकेर - निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने मंगलवार को कोयलीबेड़ा विकासखंड के अंदरूनी क्षेत्रों का दौरा कर चल रहे विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन और निर्मित पुल-पुलियों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान हरेश मंडावी भी मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने सबसे पहले बहुप्रतीक्षित मेडकी नदी पर बन रहे उच्च स्तरीय पुल का निरीक्षण किया, जिसकी लागत लगभग 11 करोड़ रुपये बताई गई है। यह पुल सेतु निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि इस पुल के बन जाने से पानीडोबीर क्षेत्र के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि बारिश के मौसम में नदी पर बने रपटा के कारण कई बार ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। कलेक्टर ने निर्माण कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए इसे निर्धारित समयसीमा में हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर ने पानीडोबीर मार्ग पर निर्मित दो पुलियों का भी निरीक्षण किया और उनकी गुणवत्ता की जानकारी ली। साथ ही नियाद नेल्लानार योजना के तहत क्लस्टर ग्राम पानीडोबीर में बन रहे अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

दौरे के दौरान कलेक्टर ने हाल ही में खोली गई एक्सिस बैंक शाखा का भी अवलोकन किया और शाखा प्रबंधक से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बैंक के एटीएम में स्वयं ट्रांजेक्शन कर सिस्टम की कार्यप्रणाली भी देखी। अधिकारियों के अनुसार यह दौरा विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित था जहां बारिश के दौरान संपर्क टूटने और बुनियादी सुविधाओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान एसडीएम पखांजूर मनीष देव साहू सहित स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या मेडकी नदी पुल जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं हर साल बारिश से पहले ही सक्रिय होती हैं, या यह केवल निरीक्षण तक सीमित रहती हैं?
  2. बारिश में संपर्क टूटने की समस्या वर्षों से क्यों बनी हुई है—क्या योजना और निष्पादन के बीच बड़ा अंतर नहीं है?
  3. अंदरूनी इलाकों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा की नियमित स्वतंत्र निगरानी क्यों नहीं की जाती?

Post a Comment

Previous Post Next Post