सतना; सूखे कुएं से उठी नई चेतना! सतना में जल बचाने उतरे अफसर, संत और ग्रामीण Aajtak24 News

सतना; सूखे कुएं से उठी नई चेतना! सतना में जल बचाने उतरे अफसर, संत और ग्रामीण Aajtak24 News

सतना - सतना के मझगवां क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक और पावन सुतीक्षण मुनि आश्रम में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन को लेकर विशाल जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के तत्वावधान में आयोजित इस “जल संवाद” कार्यक्रम में रीवा संभाग के कमिश्नर बी. एस. जामोद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेशानंद महाराज ने की। वहीं जिला पंचायत सतना के सीईओ शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक प्रवीण पाठक और जिला समन्वयक राजेश तिवारी सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत आश्रम परिसर स्थित जल स्रोत के पूजन से हुई। इसके बाद नवांकुर संस्थाओं, प्रस्फुटन समितियों, सीएमसीएलडीपी छात्रों और ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान कर गायत्री कुंड की साफ-सफाई की। लगभग एक घंटे तक चले श्रमदान के दौरान बंद पड़े जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया। इसके बाद आयोजित जल संवाद में जल संकट और उसके समाधान पर चर्चा हुई। रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद ने कहा कि “जल ही जीवन” केवल नारा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की सच्चाई है। उन्होंने कहा कि सरकार जल संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन आमजन की सक्रिय भागीदारी के बिना जल संकट से निपटना संभव नहीं है।

कमिश्नर ने कहा कि सुतीक्षण मुनि आश्रम से शुरू हुआ यह अभियान पूरे संभाग में नई चेतना फैलाने का कार्य करेगा और इसे गांव-गांव तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महेशानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को देवतुल्य माना गया है और प्रकृति की रक्षा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल का अनियंत्रित दोहन आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।

जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक प्रवीण पाठक ने कहा कि परिषद गांव-गांव तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि नवांकुर संस्थाएं, प्रस्फुटन समितियां और छात्र ग्रामीणों के सहयोग से वर्षा जल संचयन और जल संरचनाओं की सफाई जैसे कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं। जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर पुराने कुओं और तालाबों के गहरीकरण का कार्य मनरेगा के माध्यम से प्राथमिकता से कराया जा रहा है ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति न बने। कार्यक्रम के अंत में कमिश्नर बी.एस. जामोद ने अधिकारियों, स्वयंसेवकों और ग्रामीणों को जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन की सामूहिक शपथ दिलाई।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जल संरक्षण को लेकर हर साल अभियान और शपथ कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन रीवा संभाग और सतना जिले में भूजल स्तर लगातार नीचे क्यों जा रहा है? क्या इन अभियानों का कोई वास्तविक परिणाम सामने आया है?
  2. पुराने तालाबों और कुओं के गहरीकरण की बात की जा रही है, लेकिन क्या प्रशासन के पास ऐसा कोई डेटा है कि पिछले वर्षों में मनरेगा के तहत जिन जल संरचनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, उनमें से कितनी आज भी उपयोगी स्थिति में हैं?
  3. जल संरक्षण में जनभागीदारी की अपील की जा रही है, लेकिन क्या प्रशासन खुद अवैध बोरवेल, जल स्रोतों पर अतिक्रमण और भूजल के अनियंत्रित दोहन पर प्रभावी कार्रवाई कर पा रहा है?

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