| श्योपुर; कलेक्टर ने सामाजिक संस्थाओं से कहा—मैदान में उतरें, लोगों तक पहुंचाएं हक Aajtak24 News |
श्योपुर - सरकारी योजनाओं का वास्तविक असर तभी दिखता है जब उनकी जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ आयोजित जन अभियान परिषद की बैठक में कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने सामाजिक संस्थाओं, नवांकुर एवं प्रस्फुटन समितियों से सीधे संवाद करते हुए उन्हें शासन और जनता के बीच सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया।
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जिला पंचायत, जन अभियान परिषद तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में योजनाओं के प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
योजनाओं की जानकारी गांव तक पहुंचे, संस्थाएं निभाएं जिम्मेदारी
कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय सामाजिक संस्थाएं केवल कार्यक्रमों तक सीमित न रहें, बल्कि लोगों को शासन की योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें वास्तविक लाभ दिलाने में भी भूमिका निभाएं। उन्होंने अपेक्षा जताई कि नवांकुर संस्थाएं अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को योजनाओं से जोड़ने के लिए सक्रिय अभियान चलाएं।
अब संस्थाओं की बनेगी डिजिटल डायरेक्टरी
बैठक में यह भी बताया गया कि दृष्टि योजना के “पंख कार्यक्रम” के तहत गैर सरकारी संगठनों और विभागों के समन्वय के लिए एक डिजिटल डायरेक्टरी तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पहचानना होगा कि कौन-सी संस्था किस क्षेत्र में काम कर रही है और उसकी विशेषज्ञता का उपयोग योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में कैसे किया जा सकता है।
जल संरक्षण को बनाया प्राथमिक एजेंडा
कलेक्टर ने जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत समुदाय आधारित जल संरक्षण गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने वर्षाजल संग्रहण, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, सोक पिट और जल अपव्यय रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने की अपील की।
‘दाना-पानी अभियान’ से प्रकृति संरक्षण का संदेश
ग्रीष्मकाल को देखते हुए पक्षियों के लिए दाना-पानी उपलब्ध कराने और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने की भी अपील की गई। प्रशासन का मानना है कि जनभागीदारी से ऐसे अभियान अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन सामाजिक संस्थाओं को योजनाओं के प्रचार-प्रसार में जोड़ा जा रहा है, उनकी कार्यक्षमता और परिणामों का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा?
2. क्या योजनाओं के प्रचार के लिए संस्थाओं को वित्तीय या प्रशासनिक सहयोग दिया जाएगा, और उसकी पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?
3. जल संरक्षण और जनभागीदारी अभियानों के लिए जिले में कोई मापनीय लक्ष्य तय किए गए हैं या यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित रहेगी?