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| भिण्ड; बाढ़ से पहले कलेक्टर की दस्तक: गांव की गलियों में पहुंचे, गंदी नालियां देख मौके पर दिए आदेश Aajtak24 News |
भिण्ड - मानसून से पहले प्रशासन अब केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहता। जिले में शुद्ध पेयजल उपलब्धता और संभावित वर्षाजल एवं बाढ़ प्रबंधन को लेकर कलेक्टर ने गांवों का मैदानी निरीक्षण तेज कर दिया है। इसी क्रम में कलेक्टर ने जनपद पंचायत मेहगांव अंतर्गत ग्राम भरौलीकलां पहुंचकर पेयजल व्यवस्था, जल निकासी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
ग्राम भ्रमण के दौरान कलेक्टर सबसे पहले पंचायत कार्यालय पहुंचे, जहां पूर्व सूचना के बावजूद पंचायत सचिव विनोद सिंह भदौरिया अनुपस्थित पाए गए। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
जहां तक पहुंचता है बाढ़ का पानी, वहां पहुंचे कलेक्टर
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और उन घरों एवं इलाकों का दौरा किया जहां हर वर्ष वर्षाकाल में पानी भरने या बाढ़ का असर पड़ता है। ग्रामीणों से संभावित जोखिम, बचाव उपाय और स्थानीय जरूरतों पर चर्चा कर प्रशासनिक तैयारी की जानकारी ली गई।
गांव की गलियों में दिखी समस्या, मौके पर दिए निर्देश
गांव की गलियों का निरीक्षण करते समय कई स्थानों पर गंदी नालियां और कीचड़युक्त रास्ते सामने आए। इस पर कलेक्टर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मेहगांव को आवश्यक स्थानों पर नाली निर्माण और जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
सड़क मांग पर भी प्रशासन का ध्यान
ग्रामीणों ने गांव में सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण की मांग रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को तकनीकी परीक्षण और नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अमायन तहसील भवन का भी किया निरीक्षण
ग्राम भ्रमण के बाद कलेक्टर ने नवीन तहसील भवन अमायन का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और आवश्यक प्रशासनिक दिशा-निर्देश दिए।
प्रेस वार्ता में पूछे जा सकने वाले 3 तीखे सवाल (जिनके सीधे जवाब खबर में नहीं हैं):
1. जिन क्षेत्रों को बाढ़ संभावित माना गया है, वहां राहत, पुनर्वास और आपात निकासी की कोई पूर्व तैयारी या समयबद्ध योजना तैयार हुई है या नहीं?
2. पंचायत सचिव की अनुपस्थिति पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए—क्या जिले में ऐसे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग होती है और अब तक कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
3. ग्रामीणों की सड़क और नाली जैसी मूलभूत मांगें लंबे समय से लंबित हैं—क्या इनके लिए बजट और कार्य प्रारंभ की कोई तय समयसीमा है?
