| सुकमा; पेड़ के नीचे लगी सरकार: कलेक्टर ने चौपाल में सुनी गांव की धड़कन, मौके पर ही निपटे लोगों के काम Aajtak24 News |
सुकमा - जिले के छिंदगढ़ विकासखंड में बुधवार को प्रशासनिक व्यवस्था का एक अलग और मानवीय चेहरा देखने को मिला, जब सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित शिविरों में अधिकारी दफ्तरों की कुर्सियां छोड़कर ग्रामीणों के बीच पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर बैठ गए। हमीरगढ़, जैमेर और पेरमारास में आयोजित इन शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और शासन की योजनाओं से जुड़ी समस्याएं सीधे अधिकारियों के सामने रखीं। शिविरों का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लोगों से प्राप्त आवेदनों का विभागीय समन्वय के साथ त्वरित निराकरण किया जाए, ताकि ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके।
जैमेर और पेरमारास में उस समय भावुक और आत्मीय माहौल बन गया जब कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और अन्य अधिकारी ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनने लगे। पेड़ के नीचे लगी इस चौपाल में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी। प्रशासन ने पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, राशन वितरण व्यवस्था, आंगनबाड़ी सेवाएं, एग्रीस्टेक पंजीयन, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और बोनस भुगतान जैसी योजनाओं की जमीनी स्थिति पर सीधे ग्रामीणों से फीडबैक लिया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले उनकी समस्याएं विभागों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता था, लेकिन शिविर गांव में लगने से उन्हें राहत मिली है। कई ग्रामीणों ने प्रशासन की इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि पहली बार अधिकारी गांव में बैठकर उनकी बात सुन रहे हैं।
शिविरों में केवल शिकायतें सुनने तक ही काम सीमित नहीं रहा, बल्कि कई मामलों का मौके पर ही निराकरण भी किया गया। नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व मामलों के साथ-साथ आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जॉब कार्ड तथा जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण जैसे कार्य तेजी से निपटाए गए। विभिन्न विभागों ने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी तत्काल पूरी की। प्रशासन का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि शासन की सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना और ग्रामीणों को त्वरित राहत उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन अब गांव-गांव पहुंचकर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस कर रहा है, ताकि लोगों को सरकारी व्यवस्था का लाभ सीधे उनके गांव में मिल सके। इस अवसर पर एसडीएम श्री पीवी खेस सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- सुशासन शिविरों में मौके पर निराकरण के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कितने मामलों का वास्तविक समाधान हुआ और कितने मामलों को सिर्फ “प्रक्रियाधीन” बताकर आगे बढ़ा दिया गया? क्या इसकी सार्वजनिक मॉनिटरिंग होगी?
- ग्रामीणों से योजनाओं पर फीडबैक लिया गया, लेकिन क्या प्रशासन उन गांवों की सूची भी जारी करेगा जहां अब तक पीएम आवास, जल जीवन मिशन या राशन जैसी योजनाएं अधूरी हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई?
- अगर प्रशासन को गांवों में जाकर पेड़ के नीचे चौपाल लगानी पड़ रही है, तो क्या यह माना जाए कि नियमित सरकारी तंत्र और स्थानीय स्तर की शिकायत व्यवस्था आम लोगों का भरोसा जीतने में विफल रही है?