| गौरेला पेंड्रा; नवागांव में सुशासन शिविर, 944 आवेदनों के साथ शुरू हुआ समाधान का बड़ा अभियान Aajtak24 News |
गौरेला पेंड्रा मरवाही - सुशासन तिहार के तहत पेण्ड्रा जनपद के ग्राम पंचायत नवागांव में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में प्रशासनिक सक्रियता का व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला। शिविर में विधायक प्रणव कुमार मरपची और कलेक्टर संतोष कुमार देवांगन की मौजूदगी में विभागीय अधिकारियों ने आवेदनों की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा ग्रामीणों के सामने रखा। शिविर में कुल 944 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 65 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। शेष आवेदनों पर संबंधित विभागों द्वारा कार्रवाई जारी है।
राजस्व मामलों पर बड़ा लक्ष्य
विधायक ने कहा कि यदि राजस्व संबंधी कार्य समय पर और सही तरीके से पूरे हो जाएं तो यह जिले के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा सुधार सहित सभी राजस्व प्रकरणों का निपटारा आगामी 30 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही शिविर में प्राप्त सीमांकन और आपसी बंटवारे से जुड़े मामलों को 31 मई तक अनिवार्य रूप से निराकृत करने के निर्देश दिए गए।
जनता के सामने सीधे जवाबदेही
शिविर की खास बात यह रही कि अधिकारियों ने मंच पर ही एक-एक कर आवेदनों की स्थिति बताई और आवेदकों को उनकी फाइलों की प्रगति से अवगत कराया। ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों को मौके पर भेजकर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
योजनाओं और सेवाओं का प्रदर्शन
शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए, जहां ड्राइविंग लाइसेंस, आयुष्मान कार्ड, श्रमिक पंजीयन, ई-केवाईसी, स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। महिला समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इसके अलावा गोद भराई, अन्नप्राशन, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, दिव्यांगों को सहायक उपकरण, पीएम आवास की चाबियां और अन्य सहायता भी वितरित की गई।
प्रशासनिक लक्ष्य और उपलब्धियां
कलेक्टर ने यह भी उल्लेख किया कि जनगणना के प्रथम चरण में जिले ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो प्रशासन और जनता के सहयोग का परिणाम है।
प्रेस वार्ता में पूछे जा सकने वाले 3 तीखे सवाल
- क्या 944 आवेदनों में से केवल 65 का निपटारा होना बताता है कि जमीनी स्तर पर राजस्व और अन्य सेवाओं की गति अभी भी धीमी है?
- 31 मई और 30 अगस्त जैसी अलग-अलग डेडलाइन क्या पहले भी तय की गई थीं, और क्या उन्हें समय पर पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद है?
- क्या शिविरों में होने वाला त्वरित समाधान स्थायी है, या बाद में वही प्रकरण फिर लंबित हो जाते हैं?