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| बड़वानी; नर्मदा का पानी बदलेगा 87 गांवों की तकदीर! कलेक्टर ने जंगल-पहाड़ पार पहुंचकर देखी 1088 करोड़ की परियोजना Aajtak24 News |
बड़वानी - जिले के पाटी विकासखंड में गुरुवार को प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहीं, जब कलेक्टर जयति सिंह ने क्षेत्र के विभिन्न गांवों का सघन दौरा कर विकास कार्यों और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं का जमीनी निरीक्षण किया। दौरे के दौरान उन्होंने नर्मदा परिक्रमा मार्ग, सिंचाई योजनाओं और पाइपलाइन विस्तार कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा अधिकारियों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने ग्राम बोरखेड़ी पहुंचकर नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए बनाए जाने वाले सर्वसुविधायुक्त आश्रय स्थल की कार्ययोजना देखी। उन्होंने वन, राजस्व और जनपद पंचायत के अधिकारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने तथा यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन का कहना है कि यह आश्रय स्थल नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा साबित होगा।
दौरे का मुख्य फोकस 1088.24 करोड़ रुपये की निवाली सूक्ष्म उद्ववहन सिंचाई परियोजना रही। कलेक्टर जयति सिंह ने ग्राम अंजराडा में पाइप पेंटिंग यार्ड का निरीक्षण कर पाइप कोटिंग और पेंटिंग कार्य की गुणवत्ता जांची। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि तकनीकी मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। ग्राम गंधावल में पाइपलाइन विस्तार कार्य का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों को कार्य की गति बढ़ाने और तय समयसीमा में परियोजना पूरी करने को कहा। साथ ही निर्माण कार्यों की क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई थी। योजना के तहत नर्मदा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए 465 मीटर ऊंचाई तक पहुंचाया जाएगा, जिससे पाटी, बड़वानी और निवाली तहसील के 87 गांवों में लगभग 33 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित हो सकेगी। परियोजना के माध्यम से किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक से कम पानी में अधिक सिंचाई कर सकेंगे। स्थानीय किसानों का मानना है कि यदि परियोजना समय पर पूरी हुई तो क्षेत्र की खेती और आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। हालांकि ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर भी है कि करोड़ों की इस परियोजना का काम तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल
- 1088 करोड़ रुपये की इस बड़ी सिंचाई परियोजना में गुणवत्ता और समयसीमा की बात हो रही है, लेकिन क्या प्रशासन यह गारंटी देगा कि परियोजना लागत और समय दोनों में देरी का शिकार नहीं होगी?
- जिन 87 गांवों को सिंचाई का लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है, क्या वहां के किसानों को परियोजना के रखरखाव, बिजली खर्च और तकनीकी उपयोग के बारे में पहले से प्रशिक्षित किया जा रहा है?
- प्रदेश में कई सिंचाई परियोजनाएं अधूरी या विवादों में रही हैं, तो क्या इस परियोजना की प्रगति और खर्च की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट व्यवस्था बनाई गई है?
