बेमेतरा; 834 फरियादें, 246 का मौके पर फैसला: मोहतरा शिविर में मंत्री के सामने खुलीं गांवों की असली परेशानियां Aajtak24 News

बेमेतरा; 834 फरियादें, 246 का मौके पर फैसला: मोहतरा शिविर में मंत्री के सामने खुलीं गांवों की असली परेशानियां Aajtak24 News

बेमेतरा - दयाल दास बघेल की मौजूदगी में बेमेतरा जिले के मोहतरा में आयोजित समाधान शिविर उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर प्रशासन के सामने पहुंचे। सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इस शिविर में कुल 834 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 814 मांग संबंधी और 20 शिकायत संबंधी आवेदन शामिल रहे। प्रशासन ने मौके पर ही 246 मामलों का निराकरण कर त्वरित कार्रवाई का दावा किया, जबकि 588 आवेदन अब भी प्रक्रियाधीन हैं।

मोहतरा के माध्यमिक शाला परिसर में आयोजित इस शिविर में राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल संकट, बिजली कटौती, सीमांकन, नामांतरण और पेंशन जैसी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों की लंबी कतारें नजर आईं। मंत्री दयाल दास बघेल ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं के निराकरण में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रशासन को गांव-गांव तक पहुंचाना है ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

शिविर में विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी। पात्र हितग्राहियों को मौके पर लाभ भी वितरित किए गए। स्कूल शिक्षा विभाग ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र और चाबियां सौंपी गईं। इसके अलावा राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जॉब कार्ड और स्वामित्व कार्ड भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत मंत्री दयाल दास बघेल द्वारा राम जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना और पौधरोपण के साथ हुई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया गया।

शिविर के दौरान मंत्री ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उन्हें अपनी समस्याएं लिखित आवेदन के माध्यम से देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपनी समस्याओं को खुलकर प्रशासन के सामने नहीं रखेंगे, तब तक उनका समाधान तेजी से संभव नहीं होगा।

मंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने की नसीहत देते हुए कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

शिविर में ग्रामीणों की भारी मौजूदगी और मौके पर हुए समाधान ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उम्मीद जरूर जगाई, लेकिन सैकड़ों लंबित आवेदन यह सवाल भी छोड़ गए कि क्या इन समस्याओं का समाधान तय समय में हो पाएगा या फिर ग्रामीणों को एक बार फिर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब 834 में से सिर्फ 246 मामलों का ही मौके पर निराकरण हो पाया, तो बाकी 588 लंबित मामलों के समाधान की समय-सीमा क्या तय की गई है?
  2. ग्रामीणों ने बिजली, पानी और आवास जैसी बुनियादी समस्याएं बड़ी संख्या में उठाईं, तो क्या यह माना जाए कि संबंधित विभाग पहले से अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं?
  3. सरकार सुशासन तिहार के जरिए गांव-गांव समाधान का दावा कर रही है, लेकिन क्या इन शिविरों के बाद लंबित आवेदनों की मॉनिटरिंग के लिए कोई जवाबदेह सिस्टम भी बनाया गया है या यह सिर्फ आयोजन बनकर रह जाएगा?

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