![]() |
| मंदसौर; 81 शिकायतें, 3 अधिकारी और सख्त निर्देश: जनसुनवाई में पेंशन मामलों पर कलेक्टर का ‘फास्ट ट्रैक’ आदेश Aajtak24 News |
मंदसौर - जिले में आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई इस बार भी आम नागरिकों की समस्याओं और प्रशासनिक जवाबदेही का केंद्र बनी रही। कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल और सीईओ जिला पंचायत श्री अनुकूल जैन ने संयुक्त रूप से 81 आवेदकों की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान कई मामलों में देरी और लंबित प्रकरणों को लेकर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया और स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन प्रकरणों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी स्थिति में विलंब स्वीकार नहीं होगा।
पेंशन और राजस्व मामलों पर कड़ा फोकस
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- पेंशन मामलों का तुरंत और प्राथमिकता से निराकरण किया जाए
- सीमांकन और नामांतरण के प्रकरण लंबित न रहें
- आरसीएमएस (RCMS) के मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाए
उन्होंने यह भी कहा कि जनसुनवाई में आए मामलों को केवल दर्ज करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वास्तविक समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।
कई मामलों पर मौके पर ही निर्देश
जनसुनवाई में विभिन्न आवेदकों द्वारा प्रस्तुत समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए:
- सुठी निवासी यशवंतसिंह को रास्ता उपलब्ध कराने के लिए तहसीलदार सितामऊ को जांच के आदेश
- कोटड़ी निवासी हिम्मतसिंह के वेतन क्रमोन्नति मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश
- पिपलिया मंडी निवासी बालुराम के मुख्यमंत्री आवास योजना मामले में शीघ्र कार्रवाई के आदेश
इसके अलावा भूमि, रजिस्ट्री, एनओसी, ड्रोन सर्वे और कृषि संबंधित कई आवेदन भी सामने आए।
जनसुनवाई का बड़ा संदेश
81 शिकायतों की सुनवाई के साथ यह स्पष्ट किया गया कि प्रशासन अब लंबित प्रकरणों पर सख्ती से कार्रवाई करेगा और नागरिकों को समयबद्ध राहत देना प्राथमिकता होगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब पेंशन जैसे बुनियादी मामलों में “त्वरित समाधान” के निर्देश देने पड़ रहे हैं, तो क्या यह स्वीकार किया जा सकता है कि सिस्टम में पहले से भारी देरी और लापरवाही मौजूद है?
- क्या जनसुनवाई अब वास्तविक समाधान का मंच है या फिर हर बार मिलने वाले निर्देशों के बावजूद फाइलें फिर से लंबित हो जाती हैं?
- RCMS और नामांतरण जैसे मामलों में लगातार निर्देशों के बावजूद सुधार क्यों नहीं दिख रहा—क्या जिम्मेदारी तय करने की कोई स्थायी व्यवस्था है?
