नीमच; कलेक्ट्रेट में बड़ा हेल्थ अलर्ट: 190 कर्मचारियों की जांच में 40 से ज्यादा को निकली गंभीर स्वास्थ्य समस्या Aajtak24 News

नीमच; कलेक्ट्रेट में बड़ा हेल्थ अलर्ट: 190 कर्मचारियों की जांच में 40 से ज्यादा को निकली गंभीर स्वास्थ्य समस्या Aajtak24 News

नीमच - कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर ने प्रशासनिक तंत्र के भीतर छिपी स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीर तस्वीर सामने ला दी। कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर आयोजित इस शिविर में अधिकारी और कर्मचारियों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें कई चिंताजनक मामले सामने आए। शिविर में कुल 190 अधिकारी-कर्मचारियों की जांच की गई, जबकि 109 लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

शिविर के दौरान की गई जांच में कई कर्मचारियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं:

  • 23 कर्मचारियों में हाई ब्लड प्रेशर
  • 17 कर्मचारियों में हाई ब्लड शुगर
  • कुल 40 से अधिक लोग स्वास्थ्य जोखिम की श्रेणी में पाए गए

इन सभी को तुरंत चिकित्सकीय परामर्श और आगे के इलाज के लिए जिला चिकित्सालय से संपर्क करने के निर्देश दिए गए।

समय पर जांच से बच सकती हैं बड़ी बीमारियां

एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. मनीष यादव ने बताया कि नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि:

  • समय-समय पर जांच कराना जरूरी है
  • जीवनशैली में सुधार आवश्यक है
  • दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए

प्रशासनिक सिस्टम में स्वास्थ्य को लेकर चिंता

यह शिविर इस बात की ओर भी संकेत करता है कि सरकारी दफ्तरों में कार्यरत कर्मचारी भी लगातार बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य जोखिम में हैं।

कलेक्टर कार्यालय में इस तरह का शिविर प्रशासनिक कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य तथ्य एक नजर में

  • कुल जांच: 190 अधिकारी-कर्मचारी
  • ब्लड सैंपल: 109
  • हाई BP केस: 23
  • हाई शुगर केस: 17

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब सरकारी दफ्तर के कर्मचारियों में ही हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के इतने मामले सामने आ रहे हैं, तो क्या यह कार्यस्थल तनाव और खराब वर्क कल्चर का संकेत नहीं है?
  2. क्या स्वास्थ्य शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, या फिर इन रिपोर्टों के बाद वास्तविक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं?
  3. अगर प्रशासनिक स्तर पर ही बड़ी संख्या में लोग बीमार निकल रहे हैं, तो क्या इससे जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है?

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