सक्ती; जनदर्शन में उठी 8 साल पुरानी फाइल से लेकर जमीन विवाद तक की गूंज Aajtak24 News

सक्ती; जनदर्शन में उठी 8 साल पुरानी फाइल से लेकर जमीन विवाद तक की गूंज Aajtak24 News

सक्ती - जिला कार्यालय में आयोजित कलेक्टर जनदर्शन में आज आमजनों की समस्याओं का सिलसिला देखने को मिला। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अमृत विकास तोपनो ने दूर-दराज से आए नागरिकों की शिकायतें और आवेदन गंभीरता से सुने। इस दौरान कुल 12 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने सभी आवेदनों को संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंपते हुए कहा कि मामलों का नियमानुसार और शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक भटकना न पड़े। जनदर्शन में जिला पंचायत सीईओ श्री वासु जैन, अपर कलेक्टर श्री बीरेंद्र लकड़ा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

किस-किस मुद्दे पर पहुंचे लोग?

जनदर्शन में आए आवेदन कई गंभीर और लंबित समस्याओं से जुड़े रहे—

  • ग्राम सर्जुनी निवासी ने मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दिलाने की मांग की
  • ग्राम बरेकेल खुर्द निवासी ने सरपंच पर कार्रवाई की शिकायत दर्ज कराई
  • ग्राम चंद्रपुर निवासी ने 8 वर्षों से लंबित भुगतान जारी करने की मांग उठाई
  • ग्राम खूंटादहरा के आवेदकों ने PM विश्वकर्मा योजना का लाभ दिलाने की अपील की
  • ग्राम बड़े रबेली निवासी ने केंद्रीय छात्रवृत्ति न मिलने की समस्या रखी
  • सक्ती निवासी ने खाता विभाजन और राजस्व रिकॉर्ड सुधार में लापरवाही की शिकायत की

इसके अलावा अन्य नागरिकों ने भी विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक समस्याओं को लेकर आवेदन दिए।

प्रशासन का दावा

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनदर्शन का उद्देश्य जनता की समस्याओं को एक ही मंच पर सुनकर उनका त्वरित समाधान करना है। इसी क्रम में प्रत्येक मंगलवार को जिला स्तरीय जनदर्शन आयोजित किया जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 8 वर्षों से लंबित भुगतान वाले मामले में अब तक जिम्मेदार अधिकारी/विभाग की पहचान क्यों नहीं हुई, और क्या किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई है?
  2. राजस्व रिकॉर्ड (खाता विभाजन) में गलती या देरी के कितने मामले जिले में लंबित हैं, और क्या इनके लिए कोई समयबद्ध निपटान प्रणाली लागू है?
  3. PM विश्वकर्मा योजना और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में आवेदन करने के बावजूद लाभ न मिलने की असली वजह सिस्टम की देरी है या पात्रता की कमी—इसकी पारदर्शी समीक्षा कब होगी?

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