| दुर्ग; मर्रा शिविर में आवेदनों का सैलाब: 786 शिकायतें, 136 का मौके पर समाधान Aajtak24 News |
दुर्ग - जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत ग्राम मर्रा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्रामीणों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुशासन तिहार के तहत आयोजित इस शिविर में विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और मांगों से जुड़े कुल 786 आवेदन प्रस्तुत किए। प्रशासन ने मौके पर 136 आवेदनों का तत्काल निराकरण कर ग्रामीणों को राहत प्रदान की, जबकि शेष आवेदनों को निर्धारित समय-सीमा में निपटाने का आश्वासन दिया गया। शिविर में दैमार, सेलूद, गाड़ाडीह, बठेनी, धौराभांठा, मर्रा, गुजरा, फेकारी, मटंग, पंदर, परसाही, सांतरा, सेमरी और द. मोखली सहित कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। सभी ने एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों के स्टॉलों के माध्यम से अपनी समस्याएं दर्ज कराईं और योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।
जिला पंचायत सीईओ श्री बजरंग दुबे ने शिविर में पहुंचकर सभी विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और आवेदनों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीणों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों। शिविर में कई हितग्राहियों को मौके पर योजनाओं का सीधा लाभ भी दिया गया। लखपति दीदी योजना के तहत भारती वर्मा, पुष्पा पाटिल, दानेश्वरी वर्मा, प्रीति यादव और मंजू वर्मा को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छह हितग्राहियों को उनके नए घर की चाबी सौंपी गई, जिससे उनके चेहरों पर खुशी झलक उठी।
खाद्य विभाग द्वारा नौ हितग्राहियों को राशन कार्ड वितरित किए गए, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को मच्छरदानी प्रदान कर स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश दिया। स्वच्छताग्राही दीदियों और शौचालय निर्माण से जुड़े हितग्राहियों को सम्मान पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा स्वामित्व योजना के तहत 10 हितग्राहियों को अधिकार पत्र और दो लोगों को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रदान किए गए। शिविर में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान और योजनाओं का लाभ सीधे वितरण का प्रयास किया गया।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 786 आवेदनों में से केवल 136 का मौके पर समाधान हुआ—क्या प्रशासन के पास बाकी 650 से अधिक मामलों के निपटारे की कोई स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तय की गई है?
- लगातार शिविरों के बावजूद आवास, राशन और स्वामित्व जैसी बुनियादी समस्याएं बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं—क्या यह माना जाए कि नियमित प्रशासनिक तंत्र अब भी पूरी तरह प्रभावी नहीं है?
- लाभ वितरण की सूची लंबी है, लेकिन क्या सरकार यह बता सकती है कि पिछले शिविरों में दिए गए लाभों का वास्तविक और स्थायी असर इन गांवों में कितना दिखाई दे रहा है?